Bilaspur: बिलासपुर में चाइल्ड हेल्पलाइन और डीसीपीयू टीम ने जीपीएस मरहाना में चलाया जागरूकता अभियान

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समाज की प्रगति और बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाना बेहद आवश्यक है। बच्चे किसी भी राष्ट्र की नींव होते हैं, और उनका संरक्षण, अधिकारों की सुरक्षा एवं स्वस्थ वातावरण देना प्रत्येक समाज और सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी कड़ी में बिलासपुर जिले में चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) और जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) ने संयुक्त रूप से 18 सितम्बर 2025 को राजकीय प्राथमिक विद्यालय मरहाना, ब्लॉक घुमारवीं में विशेष जागरूकता अभियान का आयोजन किया।

अभियान का उद्देश्य

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को उन अधिकारों और सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक करना था, जिनका सीधा संबंध उनके सुरक्षित जीवन और उज्ज्वल भविष्य से है। टीम ने विशेष रूप से चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 के बारे में विस्तृत जानकारी दी और बताया कि यह नंबर हर बच्चे के लिए मुफ्त और 24×7 उपलब्ध है। किसी भी प्रकार की आपात स्थिति, शोषण, हिंसा या उत्पीड़न की स्थिति में बच्चे इस नंबर पर कॉल कर तत्काल मदद प्राप्त कर सकते हैं।



जागरूकता के मुख्य विषय

टीम ने कार्यक्रम के दौरान बच्चों और विद्यालय स्टाफ को कई महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी, जिनमें शामिल हैं:

1. बाल भिक्षावृत्ति निषेध (Prohibition of Child Begging):
टीम ने समझाया कि बच्चों से भीख मंगवाना एक गंभीर अपराध है। बच्चों को शिक्षा और पोषण का अधिकार है, भीख मांगना उनके भविष्य को अंधकारमय करता है।

2. बाल श्रम उन्मूलन (Child Labour):
बच्चों से काम करवाना न केवल अवैध है बल्कि उनके बचपन और शिक्षा के अधिकार का हनन है। सरकार द्वारा इसके लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं।

3. बाल विवाह रोकथाम (Child Marriage):
बाल विवाह बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इस पर रोक लगाने के लिए कानून बने हैं और बच्चों को जागरूक करना बेहद जरूरी है।

4. सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श (Safe & Unsafe Touch):
बच्चों को यह सिखाया गया कि कौन सा स्पर्श सुरक्षित है और कौन सा असुरक्षित। यह जानकारी बच्चों को खुद को सुरक्षित रखने और ज़रूरत पड़ने पर सहायता लेने में मदद करती है।

5. नशे के खिलाफ जागरूकता (Awareness Against Drug Addiction):
नशा युवाओं और बच्चों के जीवन को बर्बाद कर देता है। बच्चों को इससे दूर रहने और इसके खतरों के बारे में जागरूक किया गया।

6. लापता बच्चे और कानून से संघर्षरत बच्चे (Missing Child & Child in Conflict with Law):
बच्चों को यह बताया गया कि लापता होने पर 1098 हेल्पलाइन और पुलिस की मदद तुरंत ली जानी चाहिए।

7. सरकारी प्रायोजन योजनाएँ (Government Sponsorship Schemes):
बच्चों और अभिभावकों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई, जिनका लाभ बच्चों की पढ़ाई और जीवन स्तर सुधारने में उठाया जा सकता है।

स्कूल परिसर में स्टिकर अभियान

अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए टीम ने 1098 हेल्पलाइन नंबर से जुड़े स्टिकर विद्यालय परिसर के प्रमुख स्थानों पर लगाए। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि हर बच्चा, शिक्षक और आगंतुक इस हेल्पलाइन नंबर से परिचित हो और ज़रूरत पड़ने पर तुरंत इसका उपयोग कर सके।

बच्चों और शिक्षकों की भागीदारी

इस जागरूकता अभियान में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों से सवाल-जवाब किए गए और उन्हें वास्तविक जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया कि किस प्रकार वे किसी भी संकट की घड़ी में हेल्पलाइन का उपयोग कर सकते हैं। शिक्षकों ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि ऐसे अभियान बच्चों को आत्मविश्वासी और जागरूक बनाते हैं।

चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 का महत्व

चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 बच्चों के लिए जीवनरक्षक है। यह हेल्पलाइन बच्चों को त्वरित सहायता, परामर्श और संरक्षण प्रदान करती है। चाहे मामला घरेलू हिंसा का हो, स्कूल में उत्पीड़न का हो, सड़क पर शोषण का हो या किसी अन्य प्रकार के संकट का — बच्चे इस नंबर पर कॉल कर सहायता पा सकते हैं।

अभियान का प्रभाव

इस अभियान ने न केवल बच्चों को जागरूक किया बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों को भी बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाया। अब उम्मीद की जा सकती है कि अधिक से अधिक लोग बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में आगे आएंगे और समाज से बाल भिक्षावृत्ति, बाल श्रम और बाल विवाह जैसी बुराइयों को समाप्त करने में योगदान देंगे।

निष्कर्ष

बिलासपुर के जीपीएस मरहाना में आयोजित यह जागरूकता अभियान यह साबित करता है कि यदि सही समय पर बच्चों को जागरूक किया जाए, तो वे अपने अधिकारों के प्रति सजग रह सकते हैं और हर प्रकार के शोषण और खतरे से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। चाइल्ड हेल्पलाइन और डीसीपीयू की यह पहल न केवल सराहनीय है बल्कि इसे पूरे प्रदेश में नियमित रूप से चलाने की आवश्यकता है ताकि हर बच्चा एक सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त वातावरण में अपना भविष्य संवार सके।

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