शाहपुर में श्रीमद्भागवत कथा का पांचवां दिन: साध्वी भाग्यश्री भारती ने बताया, श्रीकृष्ण की हर लीला में छिपा है गहरा आध्यात्मिक संदेश

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शाहपुर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से शाहपुर के अभिनंदन मैरिज पैलेस में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस साध्वी भाग्यश्री भारती जी ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का आध्यात्मिक महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि जब ईश्वर धरती पर अवतार धारण करते हैं तो उनकी क्रियाओं को लीला कहा जाता है। लीला का अर्थ दिव्य खेल या दिव्य क्रीड़ा है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने अवतरण काल में अनेक दिव्य लीलाएं कीं। ब्रज की कुंज गलियों से लेकर कंस के अत्याचारों से पीड़ित मथुरा और कुरुक्षेत्र के महासमरांगण तक उनकी अलौकिक लीलाओं का प्रकाश दिखाई देता है।

साध्वी भाग्यश्री भारती ने कहा कि श्रीकृष्ण की ये दिव्य क्रीड़ाएं उस समय भी सप्रयोजन थीं और आज युगों बाद भी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। सामान्य दिखाई देने वाली इन लीलाओं में असाधारण संदेश छिपे हुए हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए श्रीकृष्ण की माखन चोरी की लीला का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि नटखट कान्हा अपने ग्वाल-बालों की टोली के साथ ग्वालिनों के घरों में चोरी-छिपे प्रवेश करते और मौका मिलते ही छींके से माखन की मटकी उतारकर अपने सखाओं के साथ माखन खाते थे।

उन्होंने कहा कि नंदनंदन की माखन चोरी की लीला अत्यंत सांकेतिक है। यह संदेश देती है कि संसार द्वैतात्मक है, जिसमें माखन रूपी सार और छाछ रूपी असार दोनों मौजूद हैं। माखन चुराकर भगवान यह समझाते हैं कि मनुष्य को संसार में परम सार तत्व यानी ईश्वर का वरण करना चाहिए, न कि असार माया का। इसी तरह कंकड़ मारकर मटकी फोड़ना और मनमोहनी बांसुरी की तान छेड़ना जैसी श्रीकृष्ण की अन्य लीलाएं भी गहरे आध्यात्मिक संदेश देती हैं।

साध्वी भाग्यश्री भारती ने कहा कि वर्तमान समय में श्रीकृष्ण की लीलाओं को लेकर कई भ्रांतियां फैली हुई हैं। आज का बुद्धिजीवी वर्ग इन पारलौकिक लीलाओं को अपनी सीमित लौकिक बुद्धि के आधार पर समझने की कोशिश करता है और इसी कारण इन दिव्य लीलाओं पर तरह-तरह के सवाल खड़े हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान की लीलाओं को केवल अपनी बुद्धि से समझने का प्रयास नहीं करना चाहिए, क्योंकि ईश्वर मन, बुद्धि और वाणी से परे का विषय हैं। उन्हें केवल ज्ञान के माध्यम से समझा जा सकता है।

कथा के दौरान यजमान पूजन भी किया गया और ज्योति प्रज्वलित करने की रस्म निभाई गई। कथा के उपरांत ज्योति प्रज्वलन में ओम प्रकाश, कमल शर्मा, राकेश कटोच, वी.पी. शर्मा, अपूर्व ठाकुर और अजय आचार्य ने ज्योति प्रज्वलित की। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं ने आरती में भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया।

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