धर्मशाला, 12 अगस्त। कांगड़ा जिले में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रशासन ने किरायेदारों, श्रमिकों, घरेलू सहायकों और अन्य बाहरी लोगों के पुलिस सत्यापन को अनिवार्य कर दिया है। जिला दंडाधिकारी कांगड़ा हेमराज बैरवा ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 के तहत आदेश जारी करते हुए मकान मालिकों, संपत्ति मालिकों, व्यवसाय संचालकों, ठेकेदारों और अन्य संबंधित लोगों को अपने परिसरों में रहने या काम करने वाले व्यक्तियों का निर्धारित विवरण संबंधित पुलिस थाने में उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं।

जिला दंडाधिकारी के आदेश के अनुसार पहले से चल रही या नई किराये और सब-लेटिंग व्यवस्था के मामले में संपत्ति मालिकों और किरायेदारों को संबंधित पुलिस थाने में सात दिनों के भीतर निर्धारित घोषणा पत्र जमा करवाना होगा। इसमें पेइंग गेस्ट, दुकान, मकान आदि किराये पर देने की व्यवस्था भी शामिल है।
झुग्गियों और अस्थायी आवासों में रहने वालों का भी देना होगा विवरण
जिन लोगों ने अपनी भूमि या परिसर में किराये अथवा गैर-किराये के उद्देश्य से झुग्गियां या अस्थायी आवास स्थापित करने की अनुमति दी है, उन्हें भी निर्धारित समय सीमा के भीतर वहां रहने वाले संबंधित व्यक्तियों का विवरण पुलिस को देना होगा। इसी तरह घरेलू नौकरों और सहायकों को रखने वाले लोगों को भी निर्धारित घोषणा पत्र के माध्यम से उनके आवश्यक विवरण पुलिस को उपलब्ध करवाने होंगे।

श्रमिकों और कामगारों का रिकॉर्ड रखना भी जरूरी
ठेकेदारों, संपत्ति मालिकों, व्यवसाय संचालकों और अन्य नियोक्ताओं को उनके माध्यम से किसी भी रूप में कार्यरत श्रमिकों और कामगारों का विवरण भी निर्धारित समय सीमा में संबंधित पुलिस थाने में प्रस्तुत करना होगा। प्रशासन का कहना है कि इससे जिले में रहने और काम करने वाले लोगों का सत्यापित रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी।
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पुलिस रिपोर्ट के बाद प्रशासन ने उठाया कदम
जिला दंडाधिकारी हेमराज बैरवा ने बताया कि पुलिस विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले में कुछ ऐसे लोग भी रह रहे हैं जो संबंधित क्षेत्रों के मूल निवासी नहीं हैं और रोजगार या व्यावसायिक गतिविधियों के लिए यहां रह रहे हैं। इनमें से कुछ लोगों के असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त होने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे लोगों का उचित सत्यापन और रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण अपराधों की रोकथाम और जांच में पुलिस को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि मकान मालिकों, संपत्ति मालिकों, व्यवसायियों और ठेकेदारों की जिम्मेदारी है कि वे अपने परिसरों में रहने या काम करने वाले लोगों का सत्यापित विवरण संबंधित पुलिस थाने को उपलब्ध करवाएं। इससे जिले की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
आदेश नहीं माना तो हो सकती है कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश की अवहेलना करने वाले संपत्ति मालिकों, नियोक्ताओं, किरायेदारों अथवा अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत अभियोजन की कार्रवाई की जा सकती है।

जिला दंडाधिकारी की ओर से जारी यह आदेश 10 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गया है और 60 दिनों तक लागू रहेगा।
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