शाहपुर। पूर्व विधायक विशाल नैहरिया ने पूर्व मंत्री, पांच बार के विधायक और भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी मेजर विजय सिंह मनकोटिया को मृत्यु के बाद राजकीय सम्मान न दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति के सम्मान का मामला नहीं, बल्कि देश और प्रदेश के लिए लंबे समय तक सेवा करने वाले वरिष्ठ जनप्रतिनिधि के सम्मान से जुड़ा विषय है।
विशाल नैहरिया ने कहा कि मेजर मनकोटिया ने पहले भारतीय सेना में रहकर देश की सेवा की और इसके बाद अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में हिमाचल की जनता के लिए काम किया। वह पांच बार शाहपुर से विधायक रहे और दो बार प्रदेश सरकार में मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने कहा कि शाहपुर और हिमाचल के विकास में मेजर मनकोटिया के योगदान से सभी परिचित हैं।
उन्होंने कहा कि जब सरकार स्वयं मेजर मनकोटिया के योगदान को स्वीकार करती है, तो उनके अंतिम संस्कार के दौरान उनके कद और योगदान के अनुरूप राजकीय सम्मान क्यों नहीं दिया गया, यह सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने सरकार से इस संबंध में स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।
विशाल नैहरिया ने कहा कि राजकीय सम्मान सरकार की कृपा नहीं, बल्कि निर्धारित प्रोटोकॉल और पात्रता के आधार पर दिया जाने वाला राज्य का सम्मान है। ऐसे में सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि मेजर मनकोटिया के मामले में यह सम्मान क्यों नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि मेजर मनकोटिया का राजनीतिक जीवन अलग-अलग विचारधाराओं और सरकारों के दौर से गुजरा, लेकिन उनकी सैन्य सेवा, पांच बार विधायक के रूप में जनसेवा और मंत्री के तौर पर प्रदेश के प्रति योगदान को किसी राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
विशाल नैहरिया ने कहा कि मेजर मनकोटिया जैसे वरिष्ठ जनसेवक और पूर्व सैनिक के अंतिम संस्कार में राजकीय सम्मान न मिलना एक गंभीर प्रश्न है। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदेश की जनता को इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए और सम्मान के मामले में राजनीति के बजाय योगदान और निर्धारित प्रोटोकॉल को आधार बनाया जाना चाहिए।



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