Mandi: चार दिन बाद जब पियाला देजी गांव में पहुंची एनडीआरएफ टीम, गांववालों ने कहा- “जैसे भगवान खुद आ गए हों”

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हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सराज क्षेत्र में स्थित अत्यंत दुर्गम गांव पियाला देजी में उस समय भावुक दृश्य देखने को मिला जब राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीम चार दिन बाद राहत और बचाव कार्य के लिए गांव पहुंची। गांववासी पिछले चार दिनों से पूरी तरह से बाहरी दुनिया से कटे हुए थे। भयानक बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने न केवल सम्पर्क मार्गों को ध्वस्त कर दिया था, बल्कि गांव में न संचार व्यवस्था बची थी और न ही कोई सहायता पहुंच सकी थी। ऐसे में जब राहत दल वहां पहुंचा, तो बुजुर्गों और महिलाओं की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने भावुक होकर कहा कि जैसे भगवान ने उनकी पुकार सुन ली हो और खुद उनके बीच आ गए हों।

पियाला देजी के साथ-साथ रूकचुई और भराड़ जैसे गांवों का भी बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह टूट गया था। एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने जोखिम भरे और कठिन रास्तों को पार कर इन क्षेत्रों तक पहुंचने में सफलता पाई। राहत कार्य के दौरान कुल 65 ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। उन्हें प्राथमिक चिकित्सा, भोजन और मानसिक सहयोग भी प्रदान किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि आपदा के बाद से वे पूरी तरह अकेले पड़ गए थे। न पीने का साफ पानी था, न भोजन, और न ही कोई जानकारी कि बाहर क्या हो रहा है। ऐसे में एनडीआरएफ की टीम को देखकर उन्हें पहली बार राहत की सांस मिली।

एक महिला ने टीम से रोते हुए कहा कि उन्हें लगने लगा था कि वे दुनिया से कट चुके हैं और अब कोई उम्मीद नहीं बची। लेकिन टीम के गांव पहुंचने से उन्हें लगा कि कोई अपने मिलने आ गया हो। वहीं मंडी के उपायुक्त अपूर्व देवगन ने जानकारी दी कि प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार एनडीआरएफ, जिला प्रशासन और अन्य विभागों के समन्वित प्रयासों से यह कठिन कार्य संभव हो सका। उन्होंने यह भी कहा कि राहत और पुनर्वास कार्य लगातार और प्रभावी रूप से चलाया जा रहा है ताकि प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल की जा सके।

यह राहत अभियान उन सैकड़ों गांववासियों के लिए जीवन की एक नई उम्मीद लेकर आया है, जो आपदा के बाद खुद को पूरी तरह से भूला हुआ महसूस कर रहे थे। अब जब प्रशासन ने इन तक पहुंचने में सफलता पाई है, तो यह मिशन न केवल एक राहत कार्य है, बल्कि मानवता और समर्पण की सच्ची मिसाल भी है।

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