ग्राम पंचायत बशला शनिवार को पूरी तरह आस्था और देव परंपरा के रंग में रंग गई। यहां नवनिर्मित महासू देवता मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा महायज्ञ का शुभारंभ देवताओं के भव्य आगमन और पारंपरिक देव मिलन के साथ हुआ। जैसे ही मंडलगढ़ के आराध्य देव बोंदरा महाराज और उत्तराखंड स्थित मुख्य महासू देव स्थली से पधारे देवता साहिब डोरिया महाराज आमने-सामने हुए, पूरा क्षेत्र जयकारों, ढोल-नगाड़ों और श्रद्धालुओं की आस्था से गूंज उठा। यह दिव्य देव मिलन समारोह का सबसे आकर्षक और भावुक क्षण रहा, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

देवता महासू महाराज बशला की अगुवाई में मंदिर समिति ने सभी देवताओं और उनके साथ आए देवलुओं का पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार भव्य स्वागत किया। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनकर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया और महायज्ञ में अपनी श्रद्धा अर्पित की। आयोजन को पूरी तरह सात्विक बनाए रखने के उद्देश्य से मंदिर समिति ने पूरे समारोह के दौरान मदिरा सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है।

महायज्ञ के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा। आयोजन स्थल पर पुलिस की विशेष टीम पूरे समय तैनात रही, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। इस धार्मिक आयोजन में अढाल, बटाड़ी और मलखून सहित नावर क्षेत्र के देवता साहिब रुद्र महाराज की मंदिर समितियों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है, जिससे महायज्ञ की धार्मिक गरिमा और बढ़ गई।

ग्राम पंचायत बशला के प्रधान हैप्पी बनित मेहता ने बताया कि रविवार को वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच शिखा-पूजन की रस्म संपन्न होगी। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में महायज्ञ में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की। महायज्ञ के चलते पूरे गांव में दिनभर श्रद्धालुओं और रिश्तेदारों की आवाजाही बनी रही, जिससे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।
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