Himachal: हिमाचल में नशे पर बड़ा प्रहार! चिट्टा और ड्रग्स मामलों में फंसे सरकारी कर्मचारियों की नौकरी पर लटकी तलवार

हिमाचल प्रदेश सरकार ने नशे और मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में शामिल सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उनकी सेवाएं समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस दिशा में शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों से ऐसे कर्मचारियों से संबंधित मामलों की विस्तृत जानकारी तत्काल उपलब्ध करवाने को कहा है, ताकि सरकार के निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सके।

शिक्षा विभाग के निदेशक द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित एनसीओआरडी (नेशनल को-ऑर्डिनेशन ऑन ड्रग एनफोर्समेंट) की बैठक में प्रदेश में बढ़ते चिट्टा और अन्य नशीले पदार्थों के कारोबार तथा सेवन को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने नशे से जुड़े अपराधों में संलिप्त पाए जाने वाले सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का फैसला लिया है।

सरकार ने शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन को ऐसे मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। शिक्षा विभाग ने पुलिस अधीक्षकों को भेजे पत्र में कहा है कि कई मामलों में विभाग को केवल एफआईआर और बरामदगी से जुड़ी प्रारंभिक जानकारी मिली है, जो कार्रवाई के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की पूरी और अद्यतन जानकारी जल्द उपलब्ध करवाई जाए।

इसके साथ ही जिला उपनिदेशकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे संबंधित पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर मामलों की वर्तमान स्थिति प्राप्त करें और कार्रवाई रिपोर्ट जल्द से जल्द निदेशालय को भेजें। इस कदम को प्रदेश में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।

सरकार द्वारा तैयार सूची में शिक्षा विभाग से जुड़े कई कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें कुछ कर्मचारियों पर चिट्टा, हेरोइन, अफीम और चरस रखने या सेवन करने के आरोप हैं, जबकि कुछ मामलों में मादक पदार्थों की तस्करी के गंभीर आरोप भी दर्ज हैं। कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कम मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद होने के मामले हैं, जबकि कुछ पर बड़ी मात्रा में चरस बरामद होने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

सरकार का कहना है कि युवाओं को नशे से बचाने, प्रशासन में जनता का विश्वास बनाए रखने और प्रदेश को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के नशे के खिलाफ अभियान और जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के तहत विभागों को शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

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