Himachal: हिमाचल के जंगलों को आग से बचाने की नई मुहिम, अब चीड़ की सूखी पत्तियों से बनेगा ईंधन

हिमाचल प्रदेश में हर साल गर्मियों के दौरान जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं को रोकने के लिए अब एक नई पहल शुरू की गई है। स्पोक, रोटरी क्लब कसौली और डीएल ग्रुप ने मिलकर जंगलों में फैली सूखी पाइन नीडल यानी चीड़ की पत्तियों को उपयोगी संसाधन में बदलने का अभियान शुरू किया है। इस पहल के तहत कसौली, सोलन और नाहन के वन क्षेत्रों से चीड़ की सूखी पत्तियां एकत्रित कर उनसे ब्रीकेट और बेल्स तैयार की जाएंगी।

इस महत्वपूर्ण पहल को लेकर 10 अप्रैल 2026 को एसडीएम कसौली एमपी सिंह की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में जंगलों में आग की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए सभी विभागों और संबंधित संस्थाओं से सहयोग की अपील की गई। एसडीएम ने बीडीओ को निर्देश दिए कि मनरेगा मजदूरों के माध्यम से पाइन नीडल एकत्रित करने की संभावनाओं पर काम किया जाए ताकि बड़े स्तर पर इस अभियान को सफल बनाया जा सके।

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डीएल ग्रुप, डॉ. वाईएस परमार हॉर्टिकल्चर एवं फॉरेस्ट्री विश्वविद्यालय नौणी के सहयोग से चीड़ की पत्तियों से ब्रीकेट तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए विश्वविद्यालय परिसर में विश्व बैंक समर्थित एचपी आईडीपी परियोजना के तहत एक विशेष प्लांट भी स्थापित किया गया है। इस प्लांट में पाइन नीडल को प्रोसेस कर ईंधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले ब्रीकेट तैयार किए जाएंगे।

इस अभियान के तहत स्पोक से कर्नल एसके रदेव (सेवानिवृत्त) और विन्नी चड्ढा को वन विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के साथ समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस पहल से जहां जंगलों में आग लगने की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है, वहीं पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।

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