हिमाचल के इन खिलाड़ियों ने दुनिया में बढ़ाया देवभूमि का मान, कबड्डी से क्रिकेट और हॉकी से शूटिंग तक रचा इतिहास; पढ़ें पूरी कहानी

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हिमाचल प्रदेश के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर भी अपनी अलग पहचान बनाई है। महिला कबड्डी और क्रिकेट की विश्व विजेता भारतीय टीमों से लेकर हॉकी, वॉलीबाल, शूटिंग, तलवारबाजी, बॉक्सिंग, पैरा एथलेटिक्स और पेशेवर कुश्ती तक देवभूमि के खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों और सीमित संसाधनों के बावजूद सिरमौर, चंबा, बिलासपुर, मंडी और शिमला समेत प्रदेश के कई जिलों के खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और बड़ी प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर हिमाचल का नाम रोशन कर रहे हैं।

सिरमौर की बेटियों का कबड्डी में दबदबा

जिला सिरमौर की बेटियों ने कबड्डी और हॉकी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान बनाई है, जबकि पुरुष खिलाड़ियों ने निशानेबाजी, कबड्डी, पेशेवर कुश्ती और पैरा एथलेटिक्स में अपनी प्रतिभा दिखाई है। शिलाई की प्रियंका नेगी ने 2011 दक्षिण एशियाई खेलों, 2012 महिला कबड्डी विश्व कप और 2013 एशियन बीच गेम्स में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीते। वर्ष 2017 में ईरान के तेहरान में आयोजित एशियन स्पर्धा जीतने वाली भारतीय टीम में भी वह शामिल रहीं। सिरमौर के महारल गांव की साक्षी शर्मा 2025 महिला कबड्डी विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहीं। इससे पहले वह खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण और रजत पदक जीत चुकी हैं।

भारतीय कबड्डी टीम की रीढ़ बनीं सिरमौर की बेटियां

शिलाई के शरोग गांव की रितु नेगी भारतीय महिला कबड्डी की चर्चित प्रतिभाओं में शामिल हैं। भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तान के रूप में उन्होंने 2023 एशियाई खेलों में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। इससे पहले उन्होंने 2018 एशियाई खेलों में रजत और 2019 दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता। वर्ष 2025 में उनकी कप्तानी में भारत ने महिला कबड्डी विश्व कप भी जीता। उनका चयन एशियन गेम्स के लिए हुआ है।

शिलाई के मिल्लाह गांव की पुष्पा राणा भी भारतीय महिला कबड्डी टीम की अहम खिलाड़ी रही हैं। उन्होंने 2023 एशियाई खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता। वह 2019 दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण, 2025 एशियन कबड्डी चैंपियनशिप में स्वर्ण और 2025 महिला कबड्डी विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहीं। वह भारतीय टीम की उपकप्तान भी रह चुकी हैं। उनका चयन एशियन गेम्स के लिए हुआ है और उन्हें टीम का कप्तान बनाया गया है।

सुषमा शर्मा ने कबड्डी में बनाई अंतरराष्ट्रीय पहचान

शिलाई के द्राबिल गांव की सुषमा शर्मा ने भारतीय महिला कबड्डी टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। वह 2023 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहीं। खेल के बाद उन्होंने पुलिस सेवा में भी अपनी अलग पहचान बनाई और वर्ष 2026 में राजस्थान पुलिस में इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नत हुईं।

सीता गोसाई ने हॉकी में रोशन किया सिरमौर का नाम

अर्जुन पुरस्कार विजेता नाहन की सीता गोसाई सिरमौर की खेल विरासत की प्रमुख महिला खिलाड़ियों में शामिल हैं। वह भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रह चुकी हैं और 1990 के दशक में देश का प्रतिनिधित्व किया। वह भारतीय टीम के साथ एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाली टीम का भी हिस्सा रहीं।

निशानेबाज समरेश जंग का अंतरराष्ट्रीय जलवा

निशानेबाजी में सिरमौर का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने वाले समरेश जंग भारतीय खेल जगत के बड़े नामों में शामिल हैं। उन्होंने 2006 मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों में पांच स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीता। उन्हें राष्ट्रमंडल खेलों का डेविड डिक्सन अवॉर्ड भी मिला। वह 2008 बीजिंग ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

द ग्रेट खली ने सिरमौर से डब्ल्यूडब्ल्यूई तक बनाई पहचान

सिरमौर के शिलाई क्षेत्र के धिरैणा गांव के दलीप सिंह राणा उर्फ द ग्रेट खली ने पेशेवर कुश्ती में भारत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। वह डब्ल्यूडब्ल्यूई वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियन बनने वाले पहले भारतीय मूल के पहलवान रहे। वर्ष 2021 में उन्हें डब्ल्यूडब्ल्यूई हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया।

वीरेंद्र सिंह ने पैरा एथलेटिक्स में रचा इतिहास

श्री रेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र के लगनू गांव के वीरेंद्र सिंह ने पैरा एथलेटिक्स में सिरमौर का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। यूएई के शारजाह में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 5,000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा 1500 और 800 मीटर दौड़ में रजत पदक भी हासिल किए।

चंबा के गांव से ओलंपिक हॉकी मैदान तक पहुंचे वरुण

डलहौजी उपमंडल की ओसल पंचायत से संबंध रखने वाले हॉकी खिलाड़ी वरुण कुमार ने संघर्ष और मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय हॉकी में अपनी पहचान बनाई। भारतीय पुरुष हॉकी टीम के खिलाड़ी वरुण टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे। वरुण का परिवार चंबा से संबंध रखता है, हालांकि बाद में परिवार पंजाब के जालंधर में रहने लगा।

बरठीं के शब्द गौतम संभाल रहे टीम इंडिया की कमान

कभी बिलासपुर के बरठीं की गलियों और मैदानों में वॉलीबाल खेलते हुए बड़े सपने देखने वाले शब्द गौतम आज भारत की युवा वॉलीबाल टीम की कमान संभाल रहे हैं। दोहा में चल रही अंडर-17 वॉलीबाल विश्व चैंपियनशिप में शब्द भारतीय टीम के कप्तान की भूमिका निभा रहे हैं। बरठीं गांव के शब्द की प्रतिभा को पहचान एशियन अंडर-16 वॉलीबाल चैंपियनशिप में मिली। थाईलैंड में हुई प्रतियोगिता में वह प्रदेश से भारतीय टीम में चयनित एकमात्र खिलाड़ी थे। भारत ने जापान को हराकर कांस्य पदक जीता। शानदार प्रदर्शन के चलते शब्द को सर्वश्रेष्ठ लिबरो चुना गया। कांस्य पदक के साथ भारतीय टीम ने अंडर-17 विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया। इसके बाद उनका चयन भारतीय अंडर-17 वॉलीबाल टीम में हुआ और उन्हें टीम की कप्तानी सौंपी गई। अब वह दोहा में विश्व चैंपियनशिप में भारत का नेतृत्व कर रहे हैं।

मंडी के खिलाड़ियों ने भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकाया नाम

छोटी काशी मंडी खेल प्रतिभाओं के मामले में अलग पहचान रखती है। जिले के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, पैरा खेल और कबड्डी सहित विभिन्न खेलों में खिलाड़ियों ने प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है।

जोगिंद्रनगर क्षेत्र के लंबी दूरी के धावक सावन बरवाल ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर पहचान बनाई। एशियाई हाफ मैराथन में पदक जीतने के बाद उन्होंने भारतीय लंबी दूरी की दौड़ में अपनी मजबूत दावेदारी पेश की। अप्रैल 2026 में रॉटरडैम मैराथन में उन्होंने 2 घंटे 11 मिनट 58 सेकंड का समय लेकर भारतीय मैराथन रिकॉर्ड बनाया।

मुक्केबाज आशीष कुमार और कबड्डी खिलाड़ी भावना देवी ने भी बढ़ाया मान

मंडी जिले के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों में मुक्केबाज आशीष कुमार का नाम भी प्रमुख है। उन्होंने बॉक्सिंग में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाई। राष्ट्रमंडल खेलों सहित कई बड़ी प्रतियोगिताओं में भाग लेकर उन्होंने हिमाचल की खेल प्रतिभा को नई पहचान दी।

मंडी के पंडोह के पिपला गलू गांव की भावना देवी भारतीय महिला कबड्डी टीम का हिस्सा हैं। वर्ष 2026 में एशियाई खेलों की तैयारियों के लिए राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में भी उनका चयन हुआ। वह विश्व कप विजेता भारतीय महिला टीम का हिस्सा रह चुकी हैं और अब एशियाई खेलों के लिए उनका चयन हुआ है।

क्रिकेटर ऋषि धवन ने भी रचा इतिहास

मंडी शहर के क्रिकेटर ऋषि धवन भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले हिमाचल प्रदेश के पहले पुरुष क्रिकेटर हैं। उन्होंने वर्ष 2016 में भारत के लिए डेब्यू किया और भारत की ओर से 3 वनडे तथा 1 टी20 मैच खेला। उनकी कप्तानी में हिमाचल ने विजय हजारे ट्रॉफी जीती। वह आईपीएल में किंग्स इलेवन पंजाब, पंजाब किंग्स, मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेल चुके हैं। रणजी ट्रॉफी में 300 विकेट लेने वाले वह हिमाचल के पहले क्रिकेटर हैं।

अंजलि ठाकुर ने दिव्यांगता को दी चुनौती, बोशिया में देश का नाम रोशन किया

मंडी जिले की मौवीसेरी पंचायत के जन्यनी गांव की अंजलि ठाकुर ने मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद खेल के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। 18 वर्ष की उम्र में एक कार दुर्घटना के बाद उन्हें स्पाइनल कॉर्ड इंजरी हुई और गर्दन के नीचे का हिस्सा निष्क्रिय हो गया। वर्ष 2022 में चंडीगढ़ स्पाइनल रिहैब में पुनर्वास के दौरान उन्हें बोशिया खेल के बारे में जानकारी मिली।

वर्ष 2023 में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण और पेयर्स में रजत पदक जीता। उन्होंने चीन में फोर्थ एशियन गेम्स और हांगकांग में भारत का प्रतिनिधित्व किया। जुलाई 2024 में मिस्र में आयोजित वर्ल्ड बोशिया चैलेंजर्स में अंजलि ने भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा।

शिमला की खिलाड़ियों ने भी विश्व मंच पर छोड़ी छाप

शिमला जिले के खिलाड़ियों ने भी क्रिकेट, तलवारबाजी, शूटिंग और फुटबाल सहित विभिन्न खेलों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। रोहड़ू के पारसा गांव की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी रेणुका ठाकुर भारतीय महिला क्रिकेट टीम की प्रमुख तेज गेंदबाज रही हैं। वर्ष 2025 में पहली बार विश्व कप जीतने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम की वह अहम सदस्य रहीं। वर्ष 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने सबसे ज्यादा विकेट लिए।

सुषमा वर्मा ने खेला विश्व कप फाइनल

शिमला जिले के गढ़ेरी गांव की सुषमा वर्मा विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में भारतीय महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा रही हैं। वर्ष 2017 में कप्तान मिताली राज की अगुवाई में विश्व कप के फाइनल में पहुंचने वाली भारतीय टीम की वह सदस्य थीं।

रोहड़ू के शलावट गांव के विशाल कायथ ने फुटबाल में देश-दुनिया में पहचान बनाई। वह वर्ष 2018 में इंटरकॉन्टिनेंटल कप और साउथ एशियन चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे।

ज्योतिका दत्ता और सूर्य प्रताप सिंह ने भी चमकाया नाम

रोहड़ू की ज्योतिका दत्ता ने तलवारबाजी में देश का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने सीनियर कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप, एशियाई खेलों में दो बार और विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने कई पदक जीते हैं।

रोहड़ू क्षेत्र से संबंध रखने वाले सूर्य प्रताप सिंह ने शूटिंग में अपनी पहचान बनाई है। वर्ष 2019 में उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पांच पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया। इसके बाद उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व किया और अपने अन्य सहयोगी खिलाड़ियों के साथ कांस्य पदक भी जीता।

हिमाचल के इन खिलाड़ियों की उपलब्धियां बताती हैं कि पहाड़ी प्रदेश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच निकलकर इन खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मेहनत और प्रतिभा का परिचय दिया है। कबड्डी, क्रिकेट, हॉकी, वॉलीबाल, शूटिंग, तलवारबाजी, बॉक्सिंग, पैरा खेल और पेशेवर कुश्ती में उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा हैं।

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