पूर्व विधायक सतपाल रायजादा द्वारा भाजपा पर धर्म और आस्था के नाम पर राजनीति करने तथा गुरु रविदास कलश यात्रा और राम मंदिर को लेकर दिए गए बयान के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। सोमवार को भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा पलटवार करते हुए रायजादा के आरोपों को निराधार, भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना बताया। भाजपा प्रदेश सचिव कुमार सुमीत शर्मा ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास सनातन परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं के विरोध से जुड़ा रहा है, इसलिए भाजपा पर इस तरह के आरोप लगाने का उसे कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

कुमार सुमीत शर्मा ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन भाजपा और लाखों कारसेवकों के लंबे संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने न्यायालयों में राम मंदिर निर्माण का विरोध किया था, जबकि भाजपा और कारसेवकों ने इस आंदोलन के लिए बड़ा संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में अयोध्या राम मंदिर से जुड़े जिस प्रकरण का उल्लेख किया जा रहा है, उस पर उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोषियों को जेल भेजा है। उन्होंने कहा कि भाजपा किसी भी प्रकार की अनियमितता करने वालों को संरक्षण नहीं देती।

भाजपा प्रदेश सचिव ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए पार्टी के असंख्य कार्यकर्ताओं और कारसेवकों ने अपने प्राणों की आहुति दी तथा भाजपा ने अपनी सरकारों तक का बलिदान दिया। ऐसे में पूर्व विधायक द्वारा राम मंदिर और आस्था को लेकर दिए गए बयान केवल राजनीतिक सुर्खियां बटोरने का प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक राजनीति में तथ्यों के आधार पर बयान दिए जाने चाहिए।

गुरु रविदास कलश यात्रा को लेकर सतपाल रायजादा की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कुमार सुमीत शर्मा ने कहा कि यह यात्रा किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और भाईचारे को मजबूत करने के लिए निकाली जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अभियान के तहत देशभर से मिट्टी एकत्रित नहीं की गई है। केवल गुरु रविदास जी की जन्मस्थली से लाई गई पवित्र मिट्टी विभिन्न गुरु रविदास मंदिरों, भगवान शिव मंदिरों, राधा-कृष्ण मंदिरों, महर्षि वाल्मीकि मंदिरों तथा अन्य देवालयों तक पहुंचाई जा रही है, ताकि समाज में समानता और सद्भाव का संदेश दिया जा सके।

कुमार सुमीत शर्मा ने कांग्रेस पर समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 1966 में गौहत्या के विरोध में संसद की ओर मार्च कर रहे साधु-संतों पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने गोलियां चलवाई थीं। उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक सतपाल रायजादा को इस ऐतिहासिक घटना पर भी अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि मंदिरों की चिंता जताने वाले रायजादा को पीरनिगाह मंदिर से जुड़े मुद्दों पर भी जवाब देना चाहिए।
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