शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में होटल मैनेजमेंट की डिग्री दिलाने के नाम पर कथित तौर पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक निजी संस्थान ने छात्र से करीब 3.50 लाख रुपये वसूल लिए, लेकिन कोर्स पूरा होने के छह साल बाद भी उसे न तो डिग्री मिली और न ही डिप्लोमा। मामले में अदालत के हस्तक्षेप के बाद ढली थाना पुलिस ने संस्थान के चेयरमैन, समन्वयक और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और जालसाजी समेत विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

शिकायतकर्ता प्रियव्रत मौदगिल के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2017 में सीनियर सेकेंडरी पास करने के बाद होटल मैनेजमेंट में करियर बनाने का निर्णय लिया था। इसी दौरान संजौली स्थित एक निजी संस्थान के समन्वयक एवं सेंटर हेड ने उनसे संपर्क कर संस्थान में दाखिला लेने के लिए प्रेरित किया। उन्हें बताया गया कि संस्थान द्वारा प्रदान की जाने वाली डिग्री यूजीसी से मान्यता प्राप्त होगी। बाद में संस्थान की ओर से उनकी माता अमिता शर्मा को भी इसी प्रकार के आश्वासन दिए गए।

इन दावों पर भरोसा करते हुए प्रियव्रत ने अक्तूबर 2017 में तीन वर्षीय बीएससी होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग साइंस कोर्स में दाखिला लिया। कोर्स की फीस 1.74 लाख रुपये बताई गई, लेकिन अतिरिक्त फीस, डिप्लोमा शुल्क और परीक्षा शुल्क सहित कुल लगभग 3.50 लाख रुपये वसूले गए। इसके लिए परिवार ने भारतीय स्टेट बैंक से 2.94 लाख रुपये का शिक्षा ऋण लिया, जिसे संस्थान के खाते में ट्रांसफर किया गया, जबकि शेष राशि नकद जमा करवाई गई।

प्रियव्रत का आरोप है कि वर्ष 2020 में कोर्स पूरा होने के बावजूद उन्हें मूल मार्कशीट, डिग्री या डिप्लोमा उपलब्ध नहीं कराया गया। संस्थान की ओर से केवल तमिलनाडु के एक विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की अस्थायी मार्कशीट दी गई। इसके बाद उन्होंने कई बार संस्थान प्रबंधन से संपर्क किया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिलता रहा।
मामले ने तब नया मोड़ लिया जब वर्ष 2023 में शिकायतकर्ता संजौली स्थित संस्थान परिसर पहुंचे। वहां उन्हें पता चला कि संस्थान का कैंपस बंद हो चुका है और कार्यालय को भट्ठाकुफर स्थानांतरित कर दिया गया है। वहां भी उन्हें जल्द डिग्री देने का भरोसा दिया गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। शिकायतकर्ता का दावा है कि कई बैचों के अन्य छात्रों के साथ भी इसी तरह की धोखाधड़ी हुई है।

पहले पुलिस से शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। हाल ही में स्थानीय अदालत ने सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद ढली थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि कहीं इसी तरह अन्य छात्रों को भी तो ठगी का शिकार नहीं बनाया गया।
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