करसोग, 4 सितंबर 2026: माता-पिता का साया उठ जाना किसी भी बच्चे के लिए जिंदगी का सबसे बड़ा दुख होता है। ऐसे बच्चों के सामने पढ़ाई, पालन-पोषण, आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की चिंता एक साथ खड़ी हो जाती है। लेकिन मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में शुरू की गई मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना ने ऐसे बच्चों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है। यह योजना अब केवल सरकारी सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों अनाथ और बेसहारा बच्चों के लिए परिवार के सहारे की तरह काम कर रही है।
शिक्षा से लेकर अपना घर बनाने तक मदद
मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत प्रदेश सरकार अनाथ एवं बेसहारा बच्चों की शिक्षा, उच्च अध्ययन, जेब खर्च, कौशल विकास और आत्मनिर्भर भविष्य के लिए सहायता उपलब्ध करवा रही है। जिन बच्चों के पास अपना घर नहीं है, उन्हें घर निर्माण के लिए भी आर्थिक मदद दी जा रही है, ताकि वे सम्मान के साथ अपना जीवन आगे बढ़ा सकें।
करसोग में 23 लाभार्थियों को घर के लिए 3 लाख तक की सहायता
करसोग उपमंडल में योजना के तहत 23 पात्र लाभार्थियों को अपने घर के निर्माण के लिए कुल तीन लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। यह राशि चार किस्तों में दी जाती है। उपमंडल के सभी पात्र लाभार्थियों को घर निर्माण के लिए दो किस्तें प्रदान की जा चुकी हैं।
सरकार की यह सहायता केवल ईंट और सीमेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि उन बच्चों के लिए अपने घर के सपने की मजबूत नींव है, जिनके लिए कभी खुद का घर होना बहुत दूर की बात लगता था।
इन लाभार्थियों को मिल रही घर निर्माण की सहायता
घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता पाने वाले लाभार्थियों में चमन लाल, बॉवी, पीताम्बर, उत्तम चंद, पूनम शर्मा, अनु कुमारी, देशराज, मनीष खन्ना, भूपेंद्र कुमार, राजेंद्र, जगदीश, मोनिका, बृज लाल, सुनील दत्त, दिनेश कुमार, संजीव कुमार, संजय कुमार, पुष्पराज, दिनेश, यशवंत, हिम चंद, मनीष कुमार और ललित कुमार शामिल हैं।
‘अब लगता है कि हम अकेले नहीं हैं’
लाभार्थी मनीष कुमार ने बताया कि पहले उन्हें लगता था कि उनका भविष्य अंधकारमय है। लेकिन सुख-आश्रय योजना ने पढ़ाई की चिंता दूर करने के साथ जेब खर्च और अब अपना घर बनाने के लिए भी सहायता दी है। उन्होंने कहा कि अब महसूस होता है कि वे अकेले नहीं हैं। उन्होंने इस योजना के लिए मुख्यमंत्री और ‘सुक्खू सरकार’ का आभार जताया।
संजय कुमार ने भी योजना को लेकर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका भी अपना घर होगा। सुख-आश्रय योजना ने उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है। उन्होंने योजना शुरू करने के लिए राज्य सरकार का धन्यवाद किया।
‘सरकार ने परिवार जैसा अपनापन दिया’
पीताम्बर सहित अन्य लाभार्थियों ने बताया कि राज्य सरकार ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता नहीं दी, बल्कि परिवार जैसा अपनापन भी दिया है। शिक्षा, जेब खर्च और घर निर्माण की सुविधा मिलने से अब वे आत्मविश्वास के साथ अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं।
लाभार्थियों ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनके जीवन में खुशियां लौटाने के साथ पढ़ने, आगे बढ़ने और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर दिया है। लाभार्थियों ने मेहनत से पढ़ाई कर आत्मनिर्भर बनने और समाज के जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी पहचान बनाने की बात कही।
जरूरतमंद बच्चों के लिए अभिभावक की भूमिका निभा रही सरकार
मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना समाज के जरूरतमंद, बेसहारा और अनाथ बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। राज्य सरकार इन बच्चों के लिए अभिभावक की भूमिका निभाते हुए शिक्षा से लेकर जेब खर्च, उच्च शिक्षा और घर निर्माण तक सहायता उपलब्ध करवा रही है, ताकि कोई भी बच्चा संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों से समझौता न करे।
करसोग उपमंडल में योजना का असर धरातल पर दिखाई दे रहा है। लाभार्थियों के जीवन में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना बढ़ी है। योजना उनके वर्तमान को सहारा देने के साथ भविष्य को भी सम्मान और नई संभावनाओं से जोड़ रही है।
‘मुश्किल हालात में भी सपनों को मिल रही नई उड़ान’
मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना यह संदेश दे रही है कि संवेदनशील शासन केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में वास्तविक बदलाव भी ला सकता है। करसोग में योजना के सकारात्मक परिणाम इसका उदाहरण हैं। जब सरकार अभिभावक बनकर बच्चों के साथ खड़ी होती है, तो कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनके सपनों को नई उड़ान मिल सकती है।




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