Kangra: धर्मशाला-शाहपुर कैंपस बंद न हों! पूर्व विधायक विशाल नैहरिया ने केंद्र और प्रदेश सरकार से उठाई बड़ी मांग

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धर्मशाला/शाहपुर: हिमाचल प्रदेश में स्थापित केंद्रीय विश्वविद्यालय के धर्मशाला और शाहपुर स्थित हैरिटेज कैंपसों को भविष्य में भी रीजनल सेंटर के रूप में संरक्षित रखा जाना चाहिए। यह मांग धर्मशाला के पूर्व विधायक विशाल नैहरिया ने उठाई। उन्होंने कहा कि इन परिसरों को बंद करने के बजाय यहां क्षेत्रीय केंद्र (रीजनल सेंटर) स्थापित किए जाएं, ताकि उच्च शिक्षा के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आजीविका भी सुरक्षित रह सके।

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विशाल नैहरिया ने बताया कि वर्ष 2009 में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद स्थायी परिसर उपलब्ध न होने के कारण धर्मशाला के बीएड कॉलेज और शाहपुर के राजकीय महाविद्यालय में विभिन्न पाठ्यक्रमों की कक्षाएं शुरू की गई थीं। इन दोनों परिसरों ने वर्षों तक हजारों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि अब जब केंद्रीय विश्वविद्यालय का स्थायी परिसर आकार ले रहा है, तब धर्मशाला और शाहपुर के इन ऐतिहासिक परिसरों के भविष्य को लेकर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि यहां की शैक्षणिक गतिविधियां पूरी तरह समाप्त हो जाती हैं तो इससे हजारों स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित होगी।

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पूर्व विधायक ने कहा कि विश्वविद्यालय के संचालन के दौरान क्षेत्र के लोगों ने पीजी, छोटे होटल, ढाबे, स्टेशनरी, फोटोस्टेट और अन्य व्यवसाय शुरू किए थे। इनमें से कई लोगों ने ऋण लेकर अपने कारोबार खड़े किए। यदि विश्वविद्यालय यहां से पूरी तरह स्थानांतरित हो जाता है तो इन व्यवसायों पर सीधा असर पड़ेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा।

विशाल नैहरिया ने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि वह केंद्र सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर धर्मशाला और शाहपुर के हैरिटेज कैंपसों को केंद्रीय विश्वविद्यालय के रीजनल सेंटर के रूप में विकसित करने की दिशा में पहल करे। उन्होंने कहा कि जिस तरह हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के विभिन्न क्षेत्रों में रीजनल सेंटर संचालित हैं, उसी तर्ज पर केंद्रीय विश्वविद्यालय के धर्मशाला, शाहपुर, नूरपुर, चंबा और अन्य उपयुक्त स्थानों पर भी क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इससे न केवल उच्च शिक्षा का विस्तार होगा, बल्कि युवाओं को अपने क्षेत्र के पास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होगी। साथ ही जिला कांगड़ा को पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित करने की राज्य सरकार की योजना को भी मजबूती मिलेगी। शिक्षा और पर्यटन के समन्वय से यह क्षेत्र ज्ञान, अनुसंधान और पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

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विशाल नैहरिया ने कहा कि धर्मशाला और शाहपुर के ये कैंपस केवल शिक्षा के केंद्र नहीं हैं, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका भी इनसे जुड़ी हुई है। इसलिए प्रदेश सरकार को प्रदेशहित को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर केंद्र सरकार के साथ जल्द सकारात्मक पहल करनी चाहिए।

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