Himachal: सुख आश्रय योजना में बड़ा बदलाव: अब दिव्यांग माता-पिता और परित्यक्त बच्चों को भी मिलेगा सहारा

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हिमाचल प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना में अहम संशोधन किया है, जिससे अब और अधिक जरूरतमंद बच्चों को इसका लाभ मिल सकेगा। संशोधित प्रावधानों के तहत अब ऐसे दिव्यांग माता-पिता के बच्चों को भी योजना में शामिल किया गया है, जो अपने बच्चों की देखभाल करने में सक्षम नहीं हैं। इसमें वे मामले शामिल होंगे, जहां दोनों या केवल एक जीवित माता-पिता की स्थायी दिव्यांगता 70 प्रतिशत या उससे अधिक है और बच्चे की आयु 0 से 27 वर्ष के बीच है।

इसके अलावा, योजना के दायरे में अब ऐसे बच्चे भी आएंगे जो परित्यक्त हैं या जिनके एक माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है और दूसरा माता-पिता उन्हें उनके हाल पर छोड़ चुका है। ऐसे मामलों में बाल कल्याण समिति द्वारा आवश्यक जांच के बाद बच्चे को परित्यक्त घोषित किया जाएगा, जिसके बाद वह सुख आश्रय योजना का लाभ ले सकेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी अनाथ, परित्यक्त, एकल नारी और दिव्यांग माता-पिता के बच्चे, जिनकी पारिवारिक वार्षिक आय सभी स्रोतों से पांच लाख रुपये से अधिक नहीं है और जो किसी सरकारी नौकरी में नहीं हैं, इस योजना के पात्र होंगे।

धर्मशाला स्थित टोंग-लेन स्कूल में नामांकित और अध्ययनरत बच्चों को भी इस योजना में शामिल किया गया है। इसके तहत स्कूल परिसर में टोंग-लेन ट्रस्ट द्वारा संचालित छात्रावास में रहने वाले 27 वर्ष तक की आयु के वे छात्र, जो धर्मशाला या आसपास के किसी सरकारी संस्थान में पढ़ाई कर रहे हैं, सुख आश्रय योजना के तहत सुविधाओं के पात्र होंगे। इन बच्चों को सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ त्योहार भत्ता और अन्य अनुदान भी दिए जाएंगे।

जिला बाल संरक्षण अधिकारी टोंग-लेन स्कूल के बच्चों के लिए त्योहार भत्ता या अनुदान की मांग तैयार कर जिला कार्यक्रम अधिकारी को प्रस्तुत करेगा। इससे पहले स्कूल प्रभारी को नामांकित छात्रों और छात्रावास में रह रहे बच्चों की प्रमाणित सूची उपलब्ध करानी होगी। योजना के तहत 14 वर्ष तक के बच्चों को प्रति माह 1,000 रुपये और 15 से 27 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों को 2,500 रुपये प्रति माह की सहायता दी जाएगी।

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