ITBP कमांडो से चार बार के विधायक और वित्त आयोग के अध्यक्ष तक, ऐसा रहा रामपुर विधायक नंदलाल का राजनीतिक सफर
रामपुर के विधायक नंदलाल का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। राजनीति में आने से पहले वह भारत-तिब्बत सीमा पुलिस यानी ITBP में सेवाएं दे चुके हैं। विशेष सुरक्षा समूह यानी SPG में भी उनकी तैनाती रही। वर्ष 2007 में सरकारी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर रामपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने लगातार चार विधानसभा चुनाव जीतकर रामपुर की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी।
नंदलाल का जन्म 16 अप्रैल 1954 को रामपुर बुशहर के देवठी में हुआ था। उनके पिता का नाम प्यारे लाल है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से वर्ष 1976 में राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वह ITBP में भर्ती हुए और कमांडो दल का हिस्सा बने। सुरक्षा बल में सेवाएं देने के बाद वर्ष 2007 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर उन्होंने सक्रिय राजनीति की शुरुआत की।

2007 में पहली बार विधानसभा पहुंचे
वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने नंदलाल को रामपुर से प्रत्याशी बनाया। उन्होंने भाजपा के बृज लाल को 6,470 मतों के अंतर से हराकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद वर्ष 2012 के चुनाव में उन्होंने अपनी जीत दोहराई और 9,471 मतों के अंतर से चुनाव जीता।
वर्ष 2017 में भी नंदलाल ने भाजपा प्रत्याशी को 4,037 मतों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की। वर्ष 2022 में वह चौथी बार चुनाव मैदान में उतरे। इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के कौल सिंह को 567 मतों से हराया। नंदलाल को 28,397 मत मिले, जबकि कौल सिंह को 27,830 मत प्राप्त हुए।
CPS से सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष तक का सफर
वर्ष 2013 में नंदलाल को मुख्य संसदीय सचिव यानी CPS बनाया गया। इस दौरान उन्होंने विधानसभा की विभिन्न समितियों में भी जिम्मेदारियां निभाईं। वह अधीनस्थ विधान समिति और विशेषाधिकार समिति के सदस्य रहे। इसके अलावा उन्होंने विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली।
वर्ष 2018 से 2022 के दौरान वह कल्याण और ग्रामीण नियोजन समितियों के सदस्य रहे। दिसंबर 2022 में चौथी बार विधायक चुने जाने के बाद उन्हें विधानसभा की कल्याण समिति का अध्यक्ष बनाया गया। इसके साथ ही वह ग्रामीण नियोजन और आचार समिति के सदस्य भी रहे।

मार्च 2024 में प्रदेश सरकार ने नंदलाल को सातवें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया। इस आयोग का उद्देश्य पंचायतों और नगर निकायों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करना और उन्हें संसाधनों के वितरण को लेकर सिफारिशें देना है। इस नियुक्ति के साथ उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के करीबी नेताओं में गिने जाने वाले नंदलाल का रामपुर विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से राजनीतिक प्रभाव रहा है। सुरक्षा बल में सेवाओं से लेकर चार बार विधायक बनने और राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने तक उनका सफर हिमाचल प्रदेश की राजनीति में अलग पहचान रखता है।


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