बहुत याद आता है अपना रेहलू… 1947 में छूटा बचपन, आज भी दिल में जिंदा है गांव की हर याद

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शाहपुर: “बहुत याद आता है अपना रेहलू…” ये शब्द सिर्फ एक भाव नहीं, बल्कि उस इंसान के दिल की आवाज हैं, जिसने अपना बचपन उस धरती पर बिताया, जिसे इतिहास ने एक दिन उससे दूर कर दिया। शाहपुर का रेहलू आज भी अपने इतिहास, विरासत और पुरानी यादों को समेटे हुए है। कभी चंबा रियासत से जुड़े इस क्षेत्र की अपनी ऐतिहासिक पहचान रही है। रेहलू का किला भी यहां के पुराने वैभव और इतिहास की कहानी बयां करता है।

लेकिन इतिहास की किताबों से अलग, कुछ लोगों के लिए रेहलू सिर्फ एक ऐतिहासिक जगह नहीं है। वह उनका बचपन, उनका घर और उनकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा है। इन्हीं लोगों में पाकिस्तान में रहने वाले राजा शाहिद गुल्ला खान भी शामिल हैं।

राजा शाहिद बताते हैं कि 1947 में देश के बंटवारे से पहले उनका बचपन रेहलू में बीता था। उस समय उनकी उम्र महज 14 साल थी। छोटी सी उम्र, मासूम बचपन और अपना गांव ही उनकी पूरी दुनिया था। गलियों में खेलना, अपने लोगों के साथ समय बिताना, घर-आंगन की खुशियां और रेहलू की मिट्टी की खुशबू आज भी उनकी यादों में उसी तरह बसी हुई है।

फिर एक दिन सब कुछ बदल गया। देश का बंटवारा हुआ, सरहदें खिंच गईं और हजारों लोगों की तरह उन्हें भी अपना घर-आंगन छोड़कर अनजान रास्तों पर निकलना पड़ा। राजा शाहिद को भी रेहलू छोड़कर पाकिस्तान जाना पड़ा।

समय गुजरता गया और जिंदगी आगे बढ़ती रही, लेकिन पीछे छूट गया वह 14 साल का बच्चा, जिसकी यादों में आज भी रेहलू की गलियां बसी हुई हैं। कभी-कभी किसी जगह का नाम सुनना भी इंसान को वर्षों पीछे ले जाता है। रेहलू का नाम आते ही उन्हें अपना बचपन याद आता है, वह घर, वे गलियां, वे चेहरे, वे लोग और वे दिन, जिन्हें वक्त की कोई ताकत वापस नहीं ला सकती।

देश बंट गया, मगर बचपन नहीं बंटा। सरहदें खिंच गईं, लेकिन यादों के रास्ते कभी बंद नहीं हुए। आज भी उनके दिल के किसी कोने में रेहलू उसी तरह बसा हुआ है, जैसा वह 1947 से पहले था।

शायद यही जन्मभूमि का रिश्ता होता है। इंसान दुनिया के किसी भी कोने में चला जाए और कितने ही साल क्यों न बीत जाएं, बचपन की मिट्टी की खुशबू उसे बार-बार अपनी ओर बुलाती रहती है। रेहलू राजा शाहिद गुल्ला खान के लिए सिर्फ एक गांव का नाम नहीं, बल्कि उनके बचपन और उन यादों का हिस्सा है, जो बंटवारे के दशकों बाद भी दिल में जिंदा हैं।

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