Himachal: जयराम ठाकुर का सुक्खू सरकार पर बड़ा हमला, मनरेगा विरोध को बताया ‘सियासी नौटंकी’

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नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि विकसित भारत ग्रामीण आजीविका गारंटी यानी वीबी-जी राम जी के विरोध में सरकार द्वारा किया जा रहा अनशन सिर्फ अपने आलाकमान को खुश करने के लिए किया गया एक राजनीतिक दिखावा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का यह नया कानून पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। डिजिटाइजेशन और बायोमीट्रिक हाजिरी से बिचौलियों की भूमिका खत्म हो गई है, जिससे भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और गांवों का विकास तेजी से होगा।

शिमला से जारी बयान में जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री पंचायत प्रधानों के अधिकारों की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर डिजास्टर एक्ट का सहारा लेकर पंचायत चुनाव रोक दिए गए और पंचायतों को प्रशासकों के हवाले कर दिया गया। इससे गांवों में विकास कार्य ठप हो गए हैं और पंचायती राज व्यवस्था को हाशिये पर धकेल दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पंचायतें ही निष्क्रिय हैं तो मनरेगा के काम आखिर कौन कराएगा। जयराम ठाकुर ने कहा कि मनरेगा के नाम पर सुक्खू सरकार केवल घड़ियाली आंसू बहा रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही एक ही दिन में छह योजनाओं के नाम बदल दिए, जिनमें तीन योजनाएं इंदिरा गांधी और दो राजीव गांधी के नाम पर रखी गईं। उन्होंने सवाल किया कि अगर कांग्रेस को वास्तव में महात्मा गांधी की इतनी चिंता है तो वहां उनका नाम क्यों नहीं रखा गया। जयराम ठाकुर ने कहा कि जो सरकार पिछले छह महीनों में प्रदेश की 655 पंचायतों में मनरेगा के तहत एक भी दिन का रोजगार नहीं दे पाई और अपने गृह जिले में भी बजट खर्च नहीं कर सकी, वह किस नैतिक आधार पर रोजगार की बात कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा का बजट 33 हजार करोड़ से बढ़ाकर 90 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाया है। सुक्खू सरकार इसलिए असहज है क्योंकि नई व्यवस्था में 100 की बजाय 125 दिन के रोजगार की गारंटी है और इसमें वित्तीय अनुशासन के साथ बेहतर गुणवत्ता वाले कार्यों पर जोर दिया गया है।

जयराम ठाकुर ने दावा किया कि कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर किए जा रहे इस अनशन में भीड़ जुटाने के लिए प्रशासन का दुरुपयोग किया गया। अधिकारियों को ज्यादा से ज्यादा लोगों को अनशन में लाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन सरकार की नीयत और विकास विरोधी सोच से परिचित लोगों ने इस अनशन का बहिष्कार किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब सुक्खू सरकार के विकास विरोधी एजेंडे और झूठी गारंटियों को नकार चुकी है।

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