शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पारिवारिक पेंशन से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी दिवंगत सरकारी कर्मचारी की पहली पत्नी को उसकी मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन मिलती रही है, तो पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी पत्नी पारिवारिक पेंशन पर अपना दावा नहीं कर सकती। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने याचिकाकर्ता दमयंती देवी की ओर से दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि पहली पत्नी के जीवित रहते और विवाह के कायम रहते हुए की गई दूसरी शादी कानून की नजर में मान्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दिवंगत कर्मचारी की मृत्यु के समय उनकी पहली पत्नी जीवित थीं और उन्हें जीवनपर्यंत पारिवारिक पेंशन का भुगतान किया गया। ऐसे में पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी पत्नी पारिवारिक पेंशन पाने की हकदार नहीं बनती।
मामला स्वर्गीय खूब राम से जुड़ा है, जो शिक्षा विभाग में जूनियर बेसिक टीचर यानी जेबीटी के पद से 1 जून 1996 को सेवानिवृत्त हुए थे। उनका निधन 13 अक्तूबर 2014 को हुआ था। खूब राम की पहली पत्नी खिमी देवी थीं। पहली शादी से संतान न होने के कारण खूब राम ने 5 दिसंबर 1970 को याचिकाकर्ता दमयंती देवी से दूसरी शादी की थी। इस विवाह का पंजीकरण पंचायत रिकॉर्ड में दर्ज था।
खूब राम की मृत्यु के बाद उनकी पहली पत्नी खिमी देवी को पारिवारिक पेंशन मिलनी शुरू हुई। खिमी देवी का 2 जुलाई 2023 को निधन हो गया। इसके बाद दमयंती देवी ने अपने नाम पर पारिवारिक पेंशन जारी करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने बकाया राशि पर 18 फीसदी ब्याज और मुआवजे की भी मांग की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।




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