हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार के कई फैसलों, नीतियों और नियमों को बार-बार अदालत में चुनौती मिल रही है और कुछ मामलों में उन्हें असंवैधानिक करार दिया गया है। हमीरपुर दौरे के दौरान उन्होंने मेडिकल अधिकारियों की भर्ती से जुड़ी जॉब ट्रेनी नीति को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।
हमीरपुर दौरे के दौरान जयराम ठाकुर ने पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और सहयोगियों के साथ पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए आयोजित शॉर्ट-टर्म एक्सटेंशन ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य सरकार के फैसलों, नीतियों और नियमों को बार-बार अदालत में चुनौती क्यों दी जा रही है और उन्हें क्यों रद्द किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की कानून की जानकारी और उनके आसपास सलाहकारों की टीम को लेकर भी सवाल खड़े किए।
जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री के कानून की अच्छी जानकारी होने और उनके आसपास सलाहकारों की टीम होने के दावों के बावजूद सरकार को बार-बार अदालत में सवालों का सामना क्यों करना पड़ रहा है। उन्होंने पूछा कि सरकार की ओर से बनाए गए नियम, कानून, नीतियां और फैसले बार-बार असंवैधानिक क्यों घोषित किए जा रहे हैं और इसके पीछे सरकार का मकसद क्या है। ये आरोप जयराम ठाकुर ने लगाए हैं।
विपक्ष के नेता ने कहा कि ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नारे के तहत मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार असंवैधानिक नियमों, नीतियों और फैसलों का रिकॉर्ड बना रही है। उन्होंने मेडिकल अधिकारियों की भर्ती में जॉब ट्रेनी सिस्टम लागू करने के सरकार के फैसले को लेकर हाई कोर्ट के हालिया फैसले का स्वागत किया। हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियुक्ति की मूल शर्तों में बदलाव को उचित नहीं माना और चयनित डॉक्टरों को अनुबंध आधार पर नियुक्ति से जुड़े लाभ देने के निर्देश दिए हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री को समझना चाहिए कि सार्वजनिक रैलियों में दिए गए बयान अदालत में मान्य नहीं होते। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने विधानसभा में पेश किए गए कुछ कानूनों की कानूनी वैधता को लेकर भाजपा की चेतावनियों को बार-बार नजरअंदाज किया। उनके अनुसार, भाजपा ने पहले ही चेताया था कि कुछ कानून और फैसले न्यायिक जांच में टिक नहीं पाएंगे।
जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा ने सरकार को विधानसभा की गरिमा बनाए रखने के लिए ऐसे कानूनों को वापस लेने की सलाह दी थी। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के संख्याबल और अड़ियल रवैये के कारण सदन की गरिमा प्रभावित हुई है। जॉब ट्रेनी नीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने इसका विरोध किया था, क्योंकि इससे युवाओं के भविष्य पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने भाजपा की आपत्तियों को नजरअंदाज किया, जबकि पहले से चल रही भर्ती प्रक्रिया के जरिए चयनित डॉक्टरों को भी जॉब ट्रेनी सिस्टम के दायरे में लाया गया। हालिया हाई कोर्ट के फैसले में भी यह मामला मेडिकल अधिकारियों की उस भर्ती से जुड़ा है, जिसमें पदों को अनुबंध आधार पर विज्ञापित किए जाने के बाद चयनित डॉक्टरों को जॉब ट्रेनी के रूप में नियुक्त करने की व्यवस्था की गई थी।



For advertisements inquiries on HIM Live TV, Kindly contact us!
Connect with us on Facebook and WhatsApp for the latest updates!


