हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) शिमला में फीस बढ़ोतरी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने सोमवार से अपने आंदोलन को तेज करते हुए विश्वविद्यालय परिसर में सैकड़ों छात्रों के साथ आक्रोश रैली निकाली। इसके बाद संगठन ने कुलपति महावीर सिंह के कार्यालय के बाहर क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी। पहले दिन एबीवीपी के इकाई सचिव सुशील और अभिषेक अनशन पर बैठे।

एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा विभिन्न शुल्कों में की गई बढ़ोतरी को छात्र विरोधी निर्णय बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि फीस में वृद्धि का सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर, ग्रामीण क्षेत्रों और मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों पर पड़ेगा।

संगठन के अनुसार विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क उनके लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकता है। एबीवीपी इकाई अध्यक्ष अक्षय ठाकुर ने कहा कि शिक्षा को व्यापार का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में हॉस्टल, लाइब्रेरी और परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है, लेकिन इसके बावजूद फीस बढ़ाने का फैसला लिया गया।

एबीवीपी ने प्रशासन से बढ़ी हुई फीस तुरंत वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक क्रमिक भूख हड़ताल जारी रहेगी। संगठन के अनुसार आने वाले दिनों में अन्य कार्यकर्ता भी बारी-बारी से अनशन में शामिल होंगे।

इस दौरान एबीवीपी ने छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग भी दोहराई। संगठन का कहना है कि विश्वविद्यालय की नीतियों में छात्रों की भागीदारी जरूरी है और छात्र प्रतिनिधित्व नहीं होने से विद्यार्थियों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे प्रभावी ढंग से सामने नहीं आ पाते।
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