धर्मशाला, 4 जून: हिमाचल प्रदेश सरकार की दुग्ध क्षेत्र से जुड़ी नीतियों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। दूध खरीद मूल्य में लगातार बढ़ोतरी के बाद किसानों और पशुपालकों का रुझान तेजी से डेयरी व्यवसाय की ओर बढ़ा है। सरकार का दावा है कि इन प्रयासों के चलते प्रदेश में नई श्वेत क्रांति का दौर शुरू हो गया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।

पिछले तीन वर्षों में प्रदेश सरकार ने दूध के खरीद मूल्य में 21 रुपये प्रति किलो की वृद्धि की है। इस फैसले के बाद पशुपालकों की आय में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। इसका सीधा असर दुग्ध उत्पादन और संग्रहण पर भी देखने को मिला है। दिसंबर 2023 में जहां केवल 44 दुग्ध सहकारी समितियों के माध्यम से प्रतिदिन करीब 6200 लीटर दूध एकत्रित हो रहा था, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 24,000 लीटर प्रतिदिन पहुंच गया है। इसके साथ ही कांगड़ा क्लस्टर में दुग्ध सहकारी समितियों की संख्या बढ़कर 352 हो गई है।
दुग्ध क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाने के लिए कांगड़ा जिले के ढगवार में लगभग 225 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक और पूर्णतः स्वचालित दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना के सितंबर तक तैयार होने की संभावना है। इसके अलावा कांगड़ा दुग्ध संघ के तहत 20 हजार किलोलीटर क्षमता वाले दो नए चिलिंग सेंटर भी स्थापित किए जा रहे हैं।

नए दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र में दूध के अलावा फ्लेवर्ड मिल्क, दही, लस्सी, मोजरेला चीज, पनीर, योगर्ट और खोया जैसे वैल्यू एडेड उत्पादों का उत्पादन किया जाएगा। इससे किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
सरकार के अनुसार वर्तमान में सहकारी दुग्ध समितियों के माध्यम से गाय का दूध लगभग 51 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा जा रहा है। बेहतर मूल्य मिलने के कारण बड़ी संख्या में किसान और युवा पशुपालन को स्वरोजगार के रूप में अपना रहे हैं। एक वर्ष के दौरान प्रदेश में दुग्ध उत्पादन लगभग दोगुना होने का दावा किया गया है।
धर्मशाला के दाड़ी क्षेत्र के पवन बताते हैं कि पहले दूध का मूल्य करीब 30 रुपये प्रति किलो मिलता था, लेकिन अब यह बढ़कर 51 रुपये प्रति किलो हो गया है। उन्होंने कहा कि वह प्रतिदिन लगभग 10 लीटर दूध सहकारी दुग्ध सभा को देते हैं और इससे उन्हें हर महीने करीब 15 हजार रुपये की आय हो रही है। वहीं तंगरोटी के विकास सरीन का कहना है कि दूध के खरीद मूल्य में वृद्धि के बाद क्षेत्र में लोगों का रुझान डेयरी व्यवसाय की ओर बढ़ा है। उन्होंने बताया कि तंगरोटी दुग्ध सहकारी समिति के माध्यम से प्रतिदिन करीब 1200 लीटर दूध ढगवार मिल्क प्लांट को भेजा जा रहा है।

ढगवार मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के प्रबंधक अखिलेश पराशर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की नीतियों के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। दूध खरीद मूल्य में बढ़ोतरी के कारण उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और भविष्य की मांग को देखते हुए प्रसंस्करण क्षमता भी बढ़ाई जा रही है।
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