Himachal: शिक्षकों को अब करनी होगी बीएलओ ड्यूटी और पढ़ानी होंगी छठी से दसवीं कक्षाएं – शिक्षा मंत्री का सख्त आदेश

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हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अब स्कूलों में तैनात लैक्चरार (स्कूल न्यू) को न सिर्फ 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों को पढ़ाना होगा, बल्कि उन्हें छठी से दसवीं कक्षा के छात्रों को भी पढ़ाना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही उन्हें निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। मंत्री ने दो टूक कहा कि शिक्षकों को इन कार्यों से छूट नहीं दी जा सकती और वे किसी भी सूरत में इनसे इनकार नहीं कर सकते।

शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि यह व्यवस्था स्कूल लैक्चरार न्यू की भर्ती और पदोन्नति नियमों के अंतर्गत पहले से ही शामिल है। ऐसे में कोई भी शिक्षक यदि इन शैक्षणिक या गैर-शैक्षणिक कार्यों से मना करता है, तो उनके नाम की सूची तैयार की जाएगी। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब राज्य के करीब 80 प्रतिशत स्कूलों में 11वीं और 12वीं कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या में भारी गिरावट देखी जा रही है। शिक्षा मंत्री के अनुसार, उच्च कक्षाओं में छात्रों की संख्या कम होने के कारण शिक्षक छठी से दसवीं तक की कक्षाएं आसानी से ले सकते हैं। इससे न केवल शिक्षकों की कमी दूर होगी, बल्कि शैक्षणिक परिणामों में भी सुधार की उम्मीद की जा रही है।

हालांकि सरकार के इस आदेश का शिक्षकों द्वारा विरोध किया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश कंप्यूटर विज्ञान प्रवक्ता संघ ने विभाग के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे विषय विशेषज्ञता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के खिलाफ बताया है। संघ का कहना है कि स्कूल लैक्चरार न्यू को उनकी विषय विशेषज्ञता के आधार पर नियुक्त किया जाता है ताकि वे 11वीं और 12वीं में विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उचित मार्गदर्शन दे सकें। ऐसे में उन्हें छठी से दसवीं कक्षाएं पढ़ाने को कहना तर्कसंगत नहीं है।

इसी तरह, कई शिक्षक संगठनों ने बीएलओ ड्यूटी से छूट की मांग करते हुए शिक्षा मंत्री को ज्ञापन और पत्र सौंपे थे। लेकिन मंत्री रोहित ठाकुर ने इन मांगों को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षकों को दोनों प्रकार की ड्यूटी निभानी ही होंगी। उन्होंने स्कूल शिक्षा निदेशालय को भी यह निर्देश दिया है कि जो भी शिक्षक अपने दायित्वों से पीछे हटते हैं, उनकी जानकारी रिकॉर्ड में दर्ज की जाए।

वहीं, प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा स्कूलों में प्रधानाचार्यों को अधिक अधिकार देने की मांग पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि फिलहाल स्कूलों का पूरा प्रशासनिक नियंत्रण प्रधानाचार्यों को नहीं दिया गया है। इस दिशा में किसी भी प्रकार की कार्यवाही आवश्यकता अनुसार की जाएगी।

इस पूरे मामले ने राज्य के शिक्षक संगठनों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है, लेकिन सरकार अपने निर्णय पर कायम नजर आ रही है।

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