शाहपुर: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की शाहपुर तहसील के द्रम्मन गांव में प्रस्तावित आधुनिक सब्जी एवं अनाज मंडी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। परियोजना के लिए लगभग 145 पेड़ों की कटाई की तैयारी की खबर के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। लोगों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन इसके लिए पर्यावरण और रिहायशी क्षेत्र की कीमत नहीं चुकाई जानी चाहिए।

विरोध कर रहे लोगों का दावा है कि सरकार के पास चंबी क्षेत्र में पहले से सरकारी भूमि उपलब्ध है। ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि जब वैकल्पिक सरकारी जमीन मौजूद है तो फिर द्रम्मन के रिहायशी क्षेत्र में व्यावसायिक परियोजना लाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। उनका कहना है कि इससे न केवल बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई होगी, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के पर्यावरण, स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।

स्थानीय लोगों ने कहा कि एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित हिमाचल की बात करती है, वहीं दूसरी ओर 145 पेड़ों की कटाई की तैयारी कई सवाल खड़े करती है। उनका मानना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है और किसी भी परियोजना को लागू करने से पहले स्थानीय लोगों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

लोगों ने प्रदेश सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उनका आग्रह है कि यदि चंबी में सरकारी भूमि उपलब्ध है तो आधुनिक सब्जी एवं अनाज मंडी वहीं विकसित की जाए, ताकि द्रम्मन के रिहायशी क्षेत्र और यहां के प्राकृतिक पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके।

यह मामला अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। प्रभावित लोगों का कहना है कि विकास योजनाएं ऐसी हों, जिनसे क्षेत्र का विकास भी हो और पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सके।
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