हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले की कुम्हारका पंचायत में घास लाने जा रही एक महिला रास्ते में ढांक से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई। महिला को उपचार के लिए पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल चम्बा लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी नाजुक हालत को देखते हुए टांडा रेफर कर दिया गया। टांडा ले जाते समय बाथरी के पास महिला ने दम तोड़ दिया। मृतक महिला की पहचान बोबी देवी (36) पत्नी पवन कुमार, निवासी गांव कुम्हारका, डाकघर उटीप, जिला चम्बा के रूप में हुई है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
परिजनों के अनुसार, महिला शनिवार सुबह घर के साथ लगती घासनी में घास काटने के लिए जा रही थी। इसी दौरान वह रास्ते में ढांक से नीचे गिर गई। हादसे में उसके सिर और टांग में गहरी चोटें आईं। उसके साथ घास काटने जा रहे लोगों ने परिजनों को घटना की सूचना दी, जिसके बाद महिला को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज चम्बा पहुंचाया गया। परिजनों ने महिला की मौत के लिए 108 एंबुलेंस प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। उसके भतीजे अमित कुमार का आरोप है कि वे सुबह करीब 7 बजे घायल महिला को मेडिकल कॉलेज ले आए थे। यहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे टांडा रेफर कर दिया गया, लेकिन करीब पौने 10 बजे एंबुलेंस पहुंची। इसके बाद महिला को टांडा ले जाया गया, लेकिन बाथरी पहुंचते ही उसने दम तोड़ दिया। दोपहर बाद मेडिकल कॉलेज चम्बा में महिला का पोस्टमार्टम करवाया गया और शव परिजनों को सौंप दिया गया। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की सूचना पर पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज किए।
अमित कुमार ने आरोप लगाया कि करीब साढ़े 7 बजे एंबुलेंस के लिए कॉल करने के बाद उन्हें कभी एंबुलेंस के टायर बदलने तो कभी डीजल भरवाकर जल्द पहुंचने का आश्वासन दिया जाता रहा। उनके अनुसार, इसी वजह से वे दूसरी निजी एंबुलेंस भी हायर नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि कई बड़े नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों से फोन करवाने के बाद एंबुलेंस उपलब्ध हो पाई, लेकिन जब तक एंबुलेंस पहुंची, तब तक हुई देरी का मरीज को बचाने में कोई लाभ नहीं हुआ। अमित ने यह भी आरोप लगाया कि बाथरी में महिला की मौत के बाद शव को वापस चम्बा लाने में भी 108 की ओर से आनाकानी की गई और उन्हें अपनी निजी गाड़ी हायर करने की बात कही गई, जिसमें भी काफी समय लग गया।
वहीं 108 सेवा के प्रभारी सुनील ने बताया कि उन्हें सुबह 8 बजकर 21 मिनट पर केस की जानकारी मिली थी। इसके बाद समय पर एंबुलेंस उपलब्ध करवाई गई। उन्होंने कहा कि महिला की हालत गंभीर थी और वैंटिलेटर वाली एंबुलेंस की मांग की गई थी। एंबुलेंस बदलने में थोड़ा समय लगा, लेकिन इसके बाद मरीज को समय रहते टांडा ले जाया गया। सुनील के अनुसार, कांदू के पास पहुंचते ही महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई और बाथरी में उसकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से पूरे समय एंबुलेंस उपलब्ध करवाई गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह के मामलों में रास्ते में मरीज की मौत होने पर शव को वापस लाने का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन इसके बावजूद शव को चम्बा पहुंचाया गया, जिसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू हुई।
मेडिकल कॉलेज चम्बा के एमएस डॉ. प्रदीप ने बताया कि महिला की मौत की जानकारी मिलने के बाद 108 एंबुलेंस प्रबंधक से जवाब मांगा गया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जाएगी। वहीं जिला परिषद सदस्य करियां वार्ड राज सिंह ने आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का लगातार ढुलमुल रवैया जनता को परेशान कर रहा है। उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही को महिला की मौत का कारण बताते हुए प्रशासन से मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की।



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