रिड़कमार: राजकीय महाविद्यालय रिड़कमार में स्वतंत्रता दिवस उत्साह, उमंग और देशभक्ति के माहौल में मनाया गया। राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर महाविद्यालय परिसर और आसपास का क्षेत्र देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। समारोह में विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।

दरीणी बाजार से निकली भव्य तिरंगा रैली
स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम की शुरुआत विद्यार्थियों की ओर से निकाली गई भव्य तिरंगा रैली से हुई। विद्यार्थियों ने दरीणी बाजार से होते हुए रैली निकाली और इस दौरान लगाए गए देशभक्ति के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। रैली के बाद सभी विद्यार्थी महाविद्यालय के हॉल में एकत्रित हुए, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
देशभक्ति गीतों की अंताक्षरी ने बांधा समां
हॉल में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत विद्यार्थियों को दो टीमों में बांटकर देशभक्ति गीतों की अंताक्षरी से हुई। इसके बाद कल्पना और रेखा ने मंच संचालन की जिम्मेदारी संभाली और विभिन्न प्रतियोगिताओं का सफल आयोजन करवाया। विद्यार्थियों ने गीत, संगीत और देशभक्ति से जुड़ी शायरियों की शानदार प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में उत्साह भर दिया।

शिक्षकों की प्रस्तुतियों ने भी जीता दिल
समारोह में महाविद्यालय के शिक्षकों ने भी सक्रिय भागीदारी की। प्रोफेसर आशा मिश्रा ने प्रेरणादायक भाषण देने के साथ प्रसिद्ध गीत “ऐ मेरे वतन के लोगों” प्रस्तुत किया, जिससे माहौल भावुक हो गया। प्रोफेसर भूपेंद्र ने जोश से भरपूर गीत “मिलते हैं कदम, दुश्मन के दिल हिलते हैं” की प्रस्तुति दी।
प्रोफेसर हाकम चंद ने स्वतंत्रता के मूल उद्देश्यों, उसके महत्व और देश की आजादी को अक्षुण्ण बनाए रखने में युवाओं की भूमिका पर सारगर्भित विचार रखे। इस दौरान कई विद्यार्थियों ने भी मंच से अपने ओजस्वी भाषण प्रस्तुत किए।

कार्यवाहक प्राचार्य ने युवाओं को दिया प्रेरणादायक संदेश
महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य प्रोफेसर मनोज ने अपने संबोधन की शुरुआत प्रसिद्ध शेर “फिरदौस ब रू-ए जमीं अस्त, हमीं अस्त-ओ हमीं अस्त-ओ हमीं अस्त” से की। उन्होंने विद्यार्थियों को देश के सामने मौजूद समस्याओं को दूर करने के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कार्यक्षेत्र में पूरी निष्ठा के साथ काम करना चाहिए।
प्रोफेसर मनोज ने देशभक्ति के वास्तविक और गहरे अर्थ को समझाते हुए विद्यार्थियों को देश का भविष्य बताया तथा उन्हें देश के सुरक्षित भविष्य की उम्मीद दिलाई।
राष्ट्रगान के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में “है प्रीत जहां की रीत सदा, मैं गीत वहीं के गाता हूं” गीत की धुन के साथ सभी ने सामूहिक राष्ट्रगान गाया। इसके बाद महाविद्यालय के विद्यार्थियों और उपस्थित मेहमानों का धन्यवाद किया गया। कार्यक्रम के समापन पर चाय, पानी और मिष्ठान का वितरण किया गया।

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