कांगड़ा: गगल हवाई अड्डे के आसपास कथित तौर पर धारा 118 का उल्लंघन कर 100 कनाल से अधिक भूमि खरीदने के मामले में विजिलेंस की जांच के दौरान कई अहम खुलासे हुए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फर्जी कृषि प्रमाणपत्र के आधार पर खरीदी गई कई जमीनों के भूमि विलेखों पर खरीदार की जगह अन्य लोगों ने हस्ताक्षर किए थे। जांच में यह भी पाया गया कि हस्ताक्षर करने वाले व्यक्तियों के पास किसी प्रकार की वैध विशेष या सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी भी नहीं थी।

विजिलेंस के अनुसार, तत्कालीन पंजीयकों ने कानूनी कमियों के बावजूद इन दस्तावेजों का पंजीकरण कर दिया। यह कार्रवाई पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 32 का भी उल्लंघन मानी जा रही है। अब जांच एजेंसी उन सभी लोगों को भी जांच के दायरे में लाएगी, जिन्होंने खरीदार की जगह दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि तमलीकनामा (गिफ्ट डीड) और तबादलानामा (एक्सचेंज डीड) के माध्यम से भी भूमि की खरीद और स्थानांतरण किया गया। विजिलेंस अब इन सभी लेनदेन की भी गहन जांच करेगी। साथ ही एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि कहीं इन जमीन सौदों के पीछे बेनामी लेनदेन या किसी रसूखदार व्यक्ति की भूमिका तो नहीं रही।

जानकारी के अनुसार, प्रदेश सरकार ने धर्मशाला स्थित गगल हवाई अड्डे के आसपास कथित बेनामी और अवैध भूमि खरीद-फरोख्त की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। सरकार के निर्देशों के बाद विजिलेंस की एसआईटी ने जांच शुरू की, जिसमें कथित तौर पर बड़े स्तर पर अवैध भूमि खरीद के साक्ष्य मिले। इन्हीं साक्ष्यों और एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर विजिलेंस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

एसआईटी की जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 1998 में कांगड़ा में रहने वाले एक गैर-कृषक व्यक्ति ने धारा 118(2)(डीडी) के तहत कुछ भूमि खरीदी थी। कानून के अनुसार वह कृषक का दर्जा प्राप्त नहीं कर सकता था और भूमि अभिलेखों में उसे गैर-कृषक दर्शाने वाली टिप्पणी दर्ज करना अनिवार्य था। इसके बावजूद तत्कालीन राजस्व अधिकारियों ने जमाबंदी और म्यूटेशन रिकॉर्ड में आवश्यक प्रविष्टियां जानबूझकर दर्ज नहीं कीं।

जांच के अनुसार, इसी कथित लापरवाही का लाभ उठाते हुए आरोपी ने बिना धारा 118 की अनुमति के 61.84 कनाल कृषि भूमि खरीदी, जबकि उसकी पत्नी ने 44.43 कनाल भूमि अपने नाम कर ली। एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर विजिलेंस ने तीन आरोपियों और तत्कालीन राजस्व अधिकारियों के खिलाफ बीएनएस की धाराओं 201, 318(4), 336(2), 337, 338, 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ा दी है।
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