मैडीकल कॉलेज एवं अस्पताल चंबा में रविवार को उपचार के दौरान डेढ़ वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने चिकित्सकों और अस्पताल स्टाफ पर इलाज में कथित लापरवाही के आरोप लगाए और अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। परिजनों ने पूरे मामले की जांच करवाकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।
बेहतर इलाज की उम्मीद में चंबा पहुंचे थे परिजन
उपमंडल चुराह की ग्राम पंचायत सेईकोठी के गांव नरवाड़ निवासी कुलदीप सिंह ने बताया कि उनकी डेढ़ वर्षीय बेटी कृतिका की छाती जाम थी और उसमें खून की कमी के लक्षण थे। उन्होंने बताया कि उन्हें लगा कि नागरिक अस्पताल तीसा के बजाय मैडीकल कॉलेज एवं अस्पताल चंबा में बच्ची को बेहतर और त्वरित उपचार मिल सकेगा।
इसी उम्मीद में वह रविवार शाम करीब चार बजे बच्ची को लेकर मैडीकल कॉलेज पहुंचे। परिजनों के अनुसार, बच्ची को तुरंत दाखिल नहीं किया गया और करीब शाम 5:30 बजे उसे अस्पताल में भर्ती किया गया।
एक्स-रे और जांच के लिए भटकने का आरोप
कुलदीप सिंह का आरोप है कि बच्ची को दाखिल करने के बाद उन्हें एक्स-रे करवाने के लिए भेजा गया, लेकिन वहां कोई स्वास्थ्य कर्मी मौजूद नहीं मिला। इसके बाद दो अन्य टैस्ट करवाने के लिए कहा गया, जिसके लिए उन्हें बाहर निजी लैब के चक्कर लगाने पड़े।
परिजनों के अनुसार, निजी लैब से टैस्ट करवाकर जब वे वापस लौटे तो स्टाफ ने कहा कि बच्ची को भाप देनी होगी और इंजेक्शन लगाया जाएगा। पिता का आरोप है कि आपातकालीन कक्ष पूरी तरह इंटर्न डॉक्टरों के हवाले था और वहां कोई विशेषज्ञ या वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद नहीं था।
पौने घंटे तक तड़पती रही बच्ची, परिजनों का आरोप
कुलदीप सिंह ने आरोप लगाया कि बच्ची करीब पौने घंटे तक तड़पती रही, लेकिन उसे देखने के लिए कोई डॉक्टर नहीं आया। उनके अनुसार, बच्ची की मौत से महज 15 मिनट पहले एक डॉक्टर उसे देखने पहुंचे। इस दौरान बच्ची को इंजेक्शन लगाया गया और भाप दी गई। इसके तुरंत बाद बच्ची पूरी तरह अचेत हो गई और उसने दम तोड़ दिया।
परिजनों ने जांच और कार्रवाई की मांग की
बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने प्रशासन और सरकार से पूरे मामले की जांच करवाने की मांग की है। उन्होंने ड्यूटी में कथित तौर पर कोताही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाई है। परिजनों का कहना है कि इससे पहले भी मैडीकल कॉलेज चंबा में इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
मां बोली- ऐसे अस्पताल को सरकार बंद करे
बच्ची की मां ने रोते-बिलखते हुए कहा कि अगर मैडीकल कॉलेज में गंभीर बच्चों को समय पर सही उपचार नहीं मिल सकता तो सरकार को ऐसे अस्पताल को तुरंत बंद कर देना चाहिए।
निष्पक्ष जांच का भरोसा
मैडीकल कॉलेज के एमएस डॉ. प्रदीप ने कहा कि परिजन बच्ची के शव को अपने साथ ले गए हैं। उन्होंने कहा कि परिजनों की ओर से लगाए गए लापरवाही के आरोपों को गंभीरता से लिया गया है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और इसके लिए एक विशेष जांच कमेटी गठित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।



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