शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं। एक मामले में अदालत ने एचआरटीसी के एक ड्राइवर के वेतन पुनर्निर्धारण पर हस्तक्षेप करते हुए निगम को याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर नए सिरे से विचार करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, दूसरे मामले में स्कूल शिक्षक बिक्रम सिंह की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर उन्हें राहत प्रदान की गई है।

एचआरटीसी ड्राइवर के मामले में न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई सीधी टिप्पणी किए बिना याचिका का निपटारा किया। अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिए कि वह दो सप्ताह के भीतर अपनी मांगों और आपत्तियों के संबंध में एचआरटीसी के समक्ष नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करें। साथ ही एचआरटीसी प्रबंधन और सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया गया कि अभ्यावेदन प्राप्त होने के छह सप्ताह के भीतर कानून और लागू नियमों के अनुसार निर्णय लिया जाए।
याचिकाकर्ता अशोक कुमार सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद 16 अगस्त 2021 को पूर्व सैनिक कोटे के तहत एचआरटीसी में अनुबंध आधार पर ड्राइवर नियुक्त हुए थे। बाद में 12 अक्तूबर 2023 से उनकी सेवाएं नियमित कर दी गईं। विवाद तब शुरू हुआ जब एचआरटीसी ने 25 मार्च 2026 को कार्यालय आदेश जारी कर यह कहा कि याचिकाकर्ता सैन्य बलों से विमुक्त कार्मिक नियमावली, 1972 के तहत निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करते। इसके आधार पर नियमितीकरण की तिथि से उनका वेतन दोबारा निर्धारित कर दिया गया, जिससे उनके वेतनमान पर सीधा असर पड़ा।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वेतन कटौती से पहले उन्हें कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। साथ ही यह भी कहा गया कि उनका मामला उच्च न्यायालय के दिलबाग सिंह बनाम एचआरटीसी मामले में दिए गए फैसले से पूरी तरह आच्छादित है।
वहीं, दूसरे मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सुजानपुर थाना, जिला हमीरपुर से जुड़े प्रकरण में स्कूल शिक्षक बिक्रम सिंह की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली। न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट और याचिकाकर्ता के जांच में सहयोग को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया।

सुनवाई के दौरान अदालत में पेश स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया कि जांच के दौरान स्कूल के शिक्षकों के खिलाफ किसी भी प्रकार की शिकायत का कोई साक्ष्य नहीं मिला। अदालत ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता ने जांच में पूरा सहयोग किया है और वह पहले ही जांच प्रक्रिया में शामिल हो चुका है। इसके आधार पर अदालत ने 30 जून 2026 को जारी अंतरिम आदेश को स्थायी करते हुए अग्रिम जमानत याचिका को अंतिम रूप से मंजूर कर लिया।
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