शिमला। हिमाचल प्रदेश में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को देखते हुए राज्य सरकार ने दुर्घटना संभावित स्थलों यानी ब्लैक स्पॉट की पहचान करने का बड़ा निर्णय लिया है। इसके तहत लोक निर्माण विभाग, पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त टीम प्रदेशभर में उन स्थानों का निरीक्षण करेगी, जहां बार-बार सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर इन ब्लैक स्पॉट पर आवश्यक सुरक्षा कार्य कराए जाएंगे और इसके लिए रोड सेफ्टी फंड से धनराशि भी उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रारंभिक समीक्षा में शिमला, चंबा, सिरमौर और कांगड़ा जिले सबसे अधिक दुर्घटना संभावित क्षेत्रों के रूप में सामने आए हैं। कई स्थानों पर सड़क किनारे पैरापिट और क्रैश बैरियर नहीं हैं, जबकि कुछ जगहों पर तीखे मोड़, खराब दृश्यता और सड़क की भौगोलिक स्थिति दुर्घटनाओं का कारण बन रही है। इसके अलावा तेज रफ्तार, लापरवाही और यातायात नियमों की अनदेखी भी हादसों की बड़ी वजह पाई गई है।
सरकार की संयुक्त टीम प्रत्येक ब्लैक स्पॉट का तकनीकी निरीक्षण करेगी और दुर्घटनाओं के कारणों का विस्तृत विश्लेषण करेगी। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार क्रैश बैरियर, पैरापिट, चेतावनी संकेतक, सड़क चौड़ीकरण, बेहतर रोड मार्किंग और अन्य सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। जिन स्थानों पर चालकों की लापरवाही अधिक सामने आएगी, वहां पुलिस और परिवहन विभाग विशेष जागरूकता अभियान चलाने के साथ सख्त प्रवर्तन भी करेगा।

सरकार का उद्देश्य सड़क हादसों में कमी लाना और संवेदनशील मार्गों को अधिक सुरक्षित बनाना है। संबंधित विभागों का मानना है कि समय पर ब्लैक स्पॉट की पहचान और आवश्यक सुधार कार्यों से दुर्घटनाओं और जनहानि में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि प्रदेशभर में ब्लैक स्पॉट चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि हिमाचल की सड़कों को अधिक सुरक्षित बनाया जा सके और सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।

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