Kangra: सरकार बनी सहारा: अनाथ बच्चों के लिए वरदान साबित हो रही सुख आश्रय योजना, 27 साल तक उठा रही पूरी जिम्मेदारी

Date:

--Advertisement--

धर्मशाला, 23 जून। हर बच्चे की पहली सीख उसके माता-पिता से शुरू होती है। माता-पिता अपने बच्चों की हर जरूरत पूरी करने के लिए हरसंभव प्रयास करते हैं, लेकिन यह सौभाग्य हर बच्चे को नहीं मिल पाता। हिमाचल प्रदेश में कई ऐसे बच्चे हैं, जिनके सिर से बचपन में ही माता-पिता का साया उठ गया। ऐसे बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए उन्हें “चिल्ड्रन ऑफ स्टेट” का दर्जा दिया है।

इस पहल के तहत सरकार इन बच्चों के अभिभावक की भूमिका निभा रही है। सरकार न केवल उनकी शिक्षा और पालन-पोषण का खर्च उठा रही है, बल्कि उन्हें जेब खर्च, भ्रमण, प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध करवा रही है, ताकि उन्हें कभी यह महसूस न हो कि उनके माता-पिता उनके साथ नहीं हैं।

Advertisement

प्रदेश सरकार 27 वर्ष की आयु तक ऐसे बच्चों की शिक्षा, पालन-पोषण और अन्य जरूरतों का ध्यान रख रही है। इसके अलावा नीट और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग और अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध करवाई जा रही है। योजना के तहत अनाथ बच्चों, निराश्रितों और एकल महिलाओं को विभिन्न प्रकार की आर्थिक सहायता दी जाती है।

18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए छात्रावास सुविधा और शिक्षा हेतु एक लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। विद्यार्थियों को प्रतिमाह 4 हजार रुपये जेब खर्च के रूप में प्रदान किए जाते हैं। साथ ही, पिकनिक और शैक्षणिक भारत भ्रमण की सुविधा भी दी जाती है। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए पात्र विद्यार्थियों को स्टार्ट-अप शुरू करने के लिए दो लाख रुपये तक की सहायता मिलती है। शादी के लिए दो लाख रुपये तक का अनुदान और घर बनाने के लिए तीन बिस्वा जमीन भी उपलब्ध करवाई जाती है। 18 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को छात्रावास और कोचिंग के लिए प्रतिवर्ष एक लाख रुपये की सहायता भी दी जा रही है।

धर्मशाला के दाड़ी गांव की रहने वाली योजना की लाभार्थी दीक्षा बताती हैं कि बचपन में ही उनके माता-पिता का निधन हो गया था। परिवार में केवल वह, उनका बड़ा भाई और बीमार दादी रह गए थे। आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी और रहने के लिए उचित घर भी नहीं था। सुख आश्रय योजना के तहत उन्हें मकान निर्माण के लिए आर्थिक सहायता मिली, जिससे उन्होंने अपने पुराने घर की मरम्मत करवाई और दो नए कमरे बनाए। आज पूरा परिवार सुरक्षित और सम्मानपूर्वक अपने घर में रह रहा है।

धर्मशाला के पास्सू गांव के अमित कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना उनके जैसे युवाओं के लिए बड़ी मदद साबित हो रही है। उन्होंने घर निर्माण के लिए आवेदन किया था और उन्हें पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये की सहायता मिल चुकी है, जिससे उन्होंने अपने घर के चार कमरों का निर्माण शुरू कर दिया है।

वहीं, धर्मशाला के समीप रजोल की रहने वाली जयंतिका कहती हैं कि माता-पिता के निधन के बाद उन्हें और उनके भाई को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनके पास रहने के लिए अपना घर भी नहीं था। सुख आश्रय योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता से अब उनका अपना घर बन चुका है और वे सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं।

जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास) अशोक शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत जिला कांगड़ा में मई 2026 तक 27 वर्ष तक की आयु के 719 बच्चों को सामाजिक सुरक्षा के रूप में लगभग 57 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। इसके अलावा टोंग लेन ट्रस्ट में रह रहे करीब 200 बच्चों को भी 6.25 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है। इन बच्चों को प्रतिमाह 500 रुपये उत्सव भत्ता भी दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि गृह निर्माण सहायता के लिए इस वर्ष अब तक 36 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिन्हें प्रति लाभार्थी तीन लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की गई है। प्रथम किस्त के रूप में प्रत्येक लाभार्थी को एक-एक लाख रुपये जारी किए जा चुके हैं। जिला में दो “चिल्ड्रन ऑफ स्टेट” को घर निर्माण के लिए भूमि भी उपलब्ध करवाई गई है।

उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने कहा कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की एक संवेदनशील और अभिनव पहल है, जो समाज के कमजोर वर्ग के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि सरकार इन बच्चों को केवल सहायता नहीं दे रही, बल्कि उनके अभिभावक की भूमिका निभाते हुए उनके शिक्षा, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य की जिम्मेदारी भी उठा रही है।

For advertisements inquiries on HIM Live TV, Kindly contact us!

Connect with us on Facebook and WhatsApp for the latest updates!

--Advertisement--
--Advertisement--

Share post:

Subscribe

spot_img

Popular

More like this
Related

Kangra: दरीणी में 4.54 करोड़ का बिजली सब स्टेशन तैयार, 8 पंचायतों के 8600 उपभोक्ताओं को मिलेगा फायदा; कम वोल्टेज की समस्या होगी दूर

शाहपुर के धारकंडी क्षेत्र की दरीणी पंचायत में 4.54 करोड़ रुपये की लागत से बने 33/11 केवी विद्युत सब स्टेशन का लोकार्पण किया गया। इससे आठ पंचायतों के करीब 8600 उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा और कम वोल्टेज की समस्या दूर होने के साथ बिजली आपूर्ति बेहतर होने की उम्मीद है।

हमीरपुर विधायक आशीष शर्मा का सरकार पर पलटवार, बोले- आरोप गलत हैं तो मानहानि का केस करे कांग्रेस; FIR से नहीं डरूंगा

हमीरपुर सदर विधायक आशीष शर्मा ने एफआईआर के बाद कांग्रेस सरकार पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि यदि उनके भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप गलत या तथ्यहीन हैं तो सरकार उनके खिलाफ मानहानि का दावा कर सकती है। विधायक ने कहा कि वह एफआईआर से डरने वाले नहीं हैं और जनता से जुड़े मुद्दे उठाते रहेंगे।

राज्य मुक्त विद्यालय के छात्रों के लिए जरूरी अपडेट, 8 से 17 अक्टूबर तक होंगी मैट्रिक-जमा दो की प्रायोगिक परीक्षाएं

हिमाचल प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालय के सितंबर-अक्तूबर 2026 सत्र की मैट्रिक और जमा दो कक्षाओं की प्रायोगिक परीक्षाएं 8 से 17 अक्तूबर तक संबंधित अध्ययन केंद्रों में होंगी। बोर्ड ने परीक्षा आयोजन और शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

चामुंडा नंदिकेश्वर धाम का बदलेगा स्वरूप, गर्भगृह में लगेगा 3 किलो सोना और 6 क्विंटल चांदी; दुबई से आएगी सामग्री

शक्तिपीठ श्री चामुंडा नंदिकेश्वर धाम के कायाकल्प का काम तेजी से चल रहा है। गर्भगृह को तीन किलो सोने और छह क्विंटल चांदी से सजाने की तैयारी है। सामग्री दुबई से मंगवाई जाएगी, जबकि गर्भगृह में वियतनाम का विशेष मार्बल लगाया जा रहा है। मार्च तक निर्माण और सौंदर्यीकरण पूरा करने का लक्ष्य है।