Sirmaur: डॉ. राघव की बर्खास्तगी पर भड़का पांवटा साहिब, बाजार बंद कर सड़कों पर उतरे लोग

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आईजीएमसी शिमला में मरीज और डॉक्टर के बीच हुए विवाद के बाद डॉ. राघव नरूला के खिलाफ की गई कार्रवाई के विरोध में शुक्रवार को पांवटा साहिब में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। डॉ. राघव पांवटा साहिब के ही रहने वाले हैं, ऐसे में स्थानीय लोगों, पंजाबी बिरादरी और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस कार्रवाई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विरोध स्वरूप दोपहर तक पांवटा साहिब का बाजार बंद रखा गया और एक रोष रैली निकाली गई, जिसमें स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, व्यापारियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

रोष रैली एसडीएम कार्यालय पहुंची, जहां विधायक सुखराम चौधरी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में डॉ. राघव के खिलाफ की गई कार्रवाई को जल्दबाजी और एकतरफा बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की गई। विधायक सुखराम चौधरी ने कहा कि सरकार ने महज 24 घंटे के भीतर डॉक्टर के खिलाफ कठोर फैसला ले लिया, जबकि मामले में दोनों पक्षों की भूमिका की निष्पक्ष जांच जरूरी थी। उन्होंने मांग की कि डॉ. राघव की सेवाएं तत्काल बहाल की जाएं और पूरे मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच करवाई जाए। विधायक ने यह भी कहा कि केवल वायरल वीडियो के आधार पर इस तरह की त्वरित कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है।

कांग्रेस नेता अवनीत लांबा ने कहा कि डॉक्टर पर आरोप लगाने वाला व्यक्ति कथित रूप से आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है और उस पर पहले से मामले दर्ज हैं। ऐसे व्यक्ति की शिकायत के आधार पर डॉक्टर के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करना दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे पूरे चिकित्सक समुदाय में गहरा रोष है। प्रदर्शन के दौरान सतीश गोयल, गुरविंदर गोपी, शिवानी वर्मा और रोहतांश नागिया सहित कई सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे और सरकार से पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की।

इस मौके पर डॉ. राघव के माता-पिता भी मौजूद रहे। अपने बेटे के साथ हुए कथित अन्याय को लेकर उनकी आंखों में दर्द और पीड़ा साफ झलक रही थी। वहीं, एसडीएम पांवटा साहिब गुंजीत सिंह चीमा ने कहा कि यह मामला जांच के अधीन है और इस पर फिलहाल अधिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने बताया कि पंजाबी बिरादरी और अन्य संगठनों द्वारा सौंपा गया ज्ञापन डीसी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा, ताकि सरकार इस मामले पर गंभीरता से विचार कर सके।

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