PM Awas Yojana में गड़बड़ी की होगी जांच, किसे कितनी राशि मिली और कितना बना मकान? विधानसभा में सरकार ने खोला ऑडिट का रास्ता

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शिमला। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत मकानों के निर्माण और बजट खर्च को लेकर हिमाचल सरकार अब आंतरिक ऑडिट करवाएगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में कहा कि जांच में यह देखा जाएगा कि पात्र परिवारों को कितनी राशि मिली, उसके मुकाबले कितना निर्माण हुआ और कहीं किस्त जारी होने में देरी के कारण मकान अधूरे तो नहीं रह गए।

विधायक बिक्रम ठाकुर के सवाल पर सदन में परागपुर क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की स्थिति और सर्वे में संभावित खामियों का मुद्दा उठा। विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि कर्मचारियों की लापरवाही के कारण कई पात्र परिवार योजना का लाभ लेने से वंचित रह गए हैं। उन्होंने गलत सर्वे को दुरुस्त करने और पात्र लोगों को योजना में शामिल करने की मांग की।

तीन वर्षों में 31 जुलाई तक प्रदेश में 87,710 आवास स्वीकृत

पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 31 जुलाई तक हिमाचल प्रदेश में 87,710 आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें परागपुर विकासखंड के 1,108 आवास शामिल हैं। उन्होंने बताया कि लाभार्थियों का सत्यापन भारत सरकार के जियो आधारित आवास प्लस एप के माध्यम से किया जाता है।

मंत्री ने कहा कि सर्वे में छूटे पात्र लोगों की ग्राम सभा या बीडीओ के माध्यम से दोबारा जांच करवाई जा सकती है। जांच में पात्र पाए जाने वाले लोगों को अगले वर्ष की सूची में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।

विधायक सुखराम चौधरी ने स्वीकृत मकानों में से कितने आवास पूरे हुए और कितने अधूरे हैं, इसके साथ ही अधूरे मकानों के कारणों की जानकारी मांगी। मंत्री ने बताया कि योजना के तहत तीन चरणों में राशि जारी की जाती है और जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही किस्त जारी की जाती है। ऐसे में प्रस्तावित आंतरिक ऑडिट में राशि जारी होने और मकान के निर्माण की प्रगति के बीच तालमेल की भी जांच की जाएगी।

नई पंचायतों को मिलेंगे 50 हजार रुपये, विधायक निधि से भी इतनी राशि खर्च होगी

पंचायत घरों में फर्नीचर की कमी दूर करने के लिए अब विधायक निधि से भी 50 हजार रुपये तक खर्च किए जा सकेंगे। पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि नई पंचायतों के लिए सरकार पहले ही 50 हजार रुपये प्रति पंचायत स्वीकृत कर चुकी है। इसके अलावा विधायक अपनी विधायक निधि से भी पंचायत घरों में फर्नीचर खरीदने के लिए 50 हजार रुपये तक दे सकेंगे।

विधायक बलबीर सिंह वर्मा के सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि पंचायत घर के निर्माण के लिए विभाग के नाम कम से कम 10 बिस्वा जमीन होना अनिवार्य है। उन्होंने विधायकों से आग्रह किया कि पंचायत भवनों के लिए संभव हो तो एक बीघा से अधिक जमीन विभाग के नाम करवाई जाए। इससे भविष्य में उसी परिसर में दूसरी सरकारी योजनाओं के तहत भी भवन बनाए जा सकेंगे।

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