Chamba: पांगी में वन विभाग की बेरुखी पर फूटा दैनिक वेतनभोगियों का गुस्सा, बहाली की उठी मांग

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हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र पांगी में वन विभाग के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को इस वर्ष काम पर न रखने के फैसले से स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। बुधवार को वन विभाग दैनिक भोगी कर्मचारी संघ का एक प्रतिनिधिमंडल एसडीएम पांगी रमन घरसंघी से मिला और उन्हें ज्ञापन सौंपते हुए विभाग के निर्णय के खिलाफ विरोध जताया।

पांगी वन खंड में लगभग 56 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी पिछले 20 वर्षों से विभाग के विविध कार्यों जैसे पौधारोपण, नर्सरियों की देखरेख, जंगलों की सफाई और संरक्षण कार्यों में अपनी सेवाएं दे रहे थे। लेकिन इस बार विभाग ने उन्हें कार्य पर नहीं लिया, जिससे इन कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर संकट मंडरा गया है।

संघ के सदस्यों ने बताया कि उन्होंने वर्षों तक बिना किसी स्थायित्व की मांग किए पूरी ईमानदारी और मेहनत से काम किया है। फिर भी विभाग ने इस बार उन्हें नजरअंदाज कर दिया। चंद्रो, शेर सिंह, हीरा लाल, सुरेंद्र, वंदना, इंद्रा, आरती, कुसला, अनीता, कांता, रीता, आशा, भान देई, जोबन देई, देवराज, सुरेश और देवी सिंह जैसे कई कर्मचारी अब रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा पिछले तीन वर्षों से उनके वेतन का भुगतान समय पर नहीं किया गया है। केवल 2024 का आंशिक भुगतान ही अब तक मिला है। यह न केवल उनके अधिकारों का हनन है, बल्कि उनकी वर्षों की सेवा का अपमान भी है।

विभाग ने बजट की कमी का हवाला देते हुए इन्हें इस बार काम पर न रखने का कारण बताया है। लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि सरकार को ऐसे निर्णयों से पहले मजदूरों की स्थिति को समझना चाहिए।

इस संबंध में कर्मचारियों ने हाल ही में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से भी मिलकर अपनी पीड़ा साझा की थी। उन्होंने एसडीएम पांगी से आग्रह किया कि विभाग को निर्देश दिए जाएं कि इन कर्मचारियों को पुनः कार्य पर रखा जाए।

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया, तो वे मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। वहीं एसडीएम रमन घरसंघी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी और उच्च अधिकारियों को इसकी रिपोर्ट भेजी जाएगी।

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