हिमाचल में फिर कांपी धरती! मंडी में महसूस हुए भूकंप के झटके, जानिए कितनी रही तीव्रता और क्यों बढ़ी चिंता

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मंडी: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में रविवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे कुछ देर के लिए लोगों में दहशत का माहौल बन गया। सुबह 9 बजकर 13 मिनट और 18 सेकेंड पर आए झटकों के बाद लोग एहतियात के तौर पर अपने घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों की ओर चले गए। राहत की बात यह रही कि इस भूकंप में किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है।

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नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.1 मापी गई। इसका केंद्र मंडी जिले में जमीन से लगभग 8 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। चूंकि रविवार का दिन था, इसलिए अधिकांश लोग अपने घरों में मौजूद थे। कंपन महसूस होते ही लोग सुरक्षा के मद्देनजर घरों से बाहर निकल आए और स्थिति सामान्य होने के बाद ही वापस लौटे।

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विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही यह भूकंप कम तीव्रता का था, लेकिन यह इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में टेक्टोनिक गतिविधियां लगातार सक्रिय हैं। हिमाचल प्रदेश देश के सबसे अधिक भूकंप संवेदनशील राज्यों में शामिल है और इसका बड़ा हिस्सा भूकंपीय जोन-4 और जोन-5 में आता है।

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जोन-5 में चंबा, कांगड़ा, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और शिमला के कुछ क्षेत्र शामिल हैं, जहां बड़े भूकंप का खतरा सबसे अधिक माना जाता है। वहीं मंडी, कुल्लू, बिलासपुर, हमीरपुर, सोलन और ऊना जिले जोन-4 में आते हैं, जिन्हें भी उच्च भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्र माना जाता है।

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हिमाचल में भूकंप की चर्चा होते ही वर्ष 1905 का कांगड़ा भूकंप याद आता है। 4 अप्रैल 1905 को आए 7.8 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। इस आपदा में लगभग 20 हजार लोगों की जान चली गई थी और हजारों इमारतें पूरी तरह तबाह हो गई थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमाचल जैसे संवेदनशील राज्य में भूकंप के प्रति सतर्कता और सुरक्षा उपायों का पालन करना बेहद जरूरी है।

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