हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के थाना लंबागांव क्षेत्र में मंगलवार को दो ऐसे मामले सामने आए, जिन्होंने पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बना दिया। पहले मामले में एक महिला ने फेसबुक लाइव के दौरान थाना लंबागांव में तैनात एक कांस्टेबल पर गंभीर आरोप लगाए, जबकि दूसरे मामले में पुलिस जांच के दौरान कथित अपहरण की सूचना पूरी तरह फर्जी निकली। दोनों मामलों की जांच पुलिस ने शुरू कर दी है।

पहले मामले में महिला ने फेसबुक लाइव के जरिए आरोप लगाया कि थाना लंबागांव में तैनात एक कांस्टेबल उसे बार-बार परेशान करता है और उससे शराब तथा पैसों की मांग करता है। महिला ने वीडियो में न्याय की गुहार लगाई। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोगों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं।
वीडियो वायरल होने के बाद लंबागांव टैक्सी यूनियन पुलिसकर्मी के समर्थन में सामने आई। बड़ी संख्या में टैक्सी ऑपरेटर थाना लंबागांव पहुंचे और अपना पक्ष रखा। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 136 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

मामला दर्ज होने की जानकारी मिलने के अगले ही दिन महिला ने फिर फेसबुक लाइव किया और अपने पहले वीडियो पर माफी मांग ली। महिला ने कहा कि उसने पारिवारिक परेशानियों के कारण ऐसा कदम उठाया था और इस पूरे मामले में पुलिस की कोई गलती नहीं थी। डीएसपी पालमपुर सुनील ठाकुर ने बताया कि मामले की जांच जारी है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इसी दिन लंबागांव क्षेत्र में दूसरा मामला भी सामने आया, जो पुलिस हेल्पलाइन के कथित दुरुपयोग से जुड़ा था। एक व्यक्ति ने शिकायत दी कि कुछ लोगों ने हलेड़ मंदिर के पास एक व्यक्ति का अपहरण कर उसे गाड़ी में बैठाया और बाद में जयसिंहपुर अस्पताल के पास हाथ-पैर बांधकर फेंक दिया।

सूचना मिलते ही लंबागांव पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि कथित अपहरण जैसी कोई घटना हुई ही नहीं थी। पुलिस के अनुसार आपसी विवाद के चलते एक व्यक्ति ने दूसरे को बदनाम करने के उद्देश्य से पुलिस हेल्पलाइन का गलत इस्तेमाल किया था। इसके बाद पुलिस ने शिकायतकर्ता के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने दोनों मामलों में लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को साझा करने या पुलिस हेल्पलाइन का इस्तेमाल करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करें। अधिकारियों का कहना है कि झूठी शिकायतें और भ्रामक जानकारी न केवल जांच एजेंसियों का समय खराब करती हैं, बल्कि वास्तविक जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने में भी बाधा बनती हैं।

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