मंडी की सांसद कंगना रनौत के अधिकारी और कर्मचारियों के प्रति कथित भाषा और लहजे को लेकर नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ ने नाराजगी जताई है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर ने इसे निंदनीय बताते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों के बीच किसी भी मुद्दे पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवाद के दौरान सम्मान और भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।
सम्मानजनक व्यवहार की जताई उम्मीद
प्रदीप ठाकुर ने कहा कि जनप्रतिनिधियों से अधिकारी और कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने कहा कि सांसद की ओर से कर्मचारी वर्ग के लिए जिस तरह की भाषा और लहजे का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया, वह निंदनीय है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी वर्ग अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करता है। ऐसे में उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली भाषा को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
मतभेद के बावजूद संवाद जरूरी
महासंघ अध्यक्ष ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों को लेकर जनप्रतिनिधियों से संवाद की अपेक्षा रहती है। किसी भी मुद्दे पर मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन बातचीत के दौरान शब्दों और भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपने अधिकारों और मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाते रहे हैं। ऐसे में उनके प्रति सार्वजनिक तौर पर किसी तरह की अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित कर सकता है।
सांसद से की भाषा की गरिमा बनाए रखने की अपील
प्रदीप ठाकुर ने सांसद कंगना रनौत से आग्रह किया कि अधिकारी और कर्मचारियों के साथ संवाद करते समय भाषा की गरिमा और मर्यादा का ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारी वर्ग जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर प्रदेश के हित में काम करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों के बीच सम्मानजनक संवाद जरूरी है।



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