हिमाचल प्रदेश में करोड़ों रुपये के हिमकेयर योजना फर्जीवाड़े की जांच अब प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गई है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की विशेष जांच टीम ने मामले की जांच का दायरा बढ़ाते हुए योजना के क्रियान्वयन और नीतिगत मंजूरियों से जुड़े रिकॉर्ड जुटाने शुरू कर दिए हैं। विजिलेंस ने तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव से पूछताछ की तैयारी भी शुरू कर दी है।
जांच के तहत आईजीएमसी में रिकॉर्ड खंगाले गए हैं। निजी अस्पतालों की ओर से किए गए दावों और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की गई है। तत्कालीन वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जनक राज से पूछताछ पहले ही की जा चुकी है। अब जांच टीम प्रशासनिक स्तर पर लिए गए फैसलों और योजना से जुड़ी मंजूरियों की पड़ताल कर रही है।
जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि हिमकेयर योजना के संचालन में शीर्ष स्तर पर किस तरह की प्रशासनिक निगरानी की गई थी। उपचार की दरें तय करने और निजी अस्पतालों को योजना के पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है। इसके अलावा क्लेम की जांच, भुगतान प्रक्रिया और ऑडिट व्यवस्था से संबंधित फाइलों को भी खंगाला जा रहा है।
विजिलेंस तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव से नीतिगत मंजूरियों से जुड़े सवाल करेगी। विभाग को मिली शिकायतों और ऑडिट आपत्तियों पर की गई कार्रवाई की भी जानकारी ली जाएगी। जांच टीम यह भी जानने का प्रयास करेगी कि यदि किसी स्तर पर अनियमितताओं की जानकारी सामने आई थी, तो उन्हें रोकने या सुधारने के लिए समय रहते क्या कदम उठाए गए।
एसआईटी ने पूछताछ से पहले संबंधित दस्तावेजों को व्यवस्थित तरीके से खंगालना शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य निदेशालय, सचिवालय और आईजीएमसी के बीच हुए पत्राचार को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। आने वाले समय में इन रिकॉर्ड और पूछताछ के आधार पर जांच में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।




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