Himachal: अब थानों में नहीं पड़ेगा कबाड़! हिमाचल पुलिस की नई डिजिटल व्यवस्था से हर जब्त सामान पर रहेगी नजर

हिमाचल पुलिस का बड़ा फैसला! थानों में पड़े लावारिस सामान और जब्त वाहनों पर अब होगी डिजिटल नजर

हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग ने थानों में लंबे समय से पड़ी लावारिस और जब्त संपत्तियों के निपटान को लेकर बड़ा प्रशासनिक सुधार लागू किया है। पुलिस मुख्यालय की ओर से नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी की गई है, जिसके तहत अब थानों में रखे हर सामान की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी और तय समय सीमा में उसका निपटारा करना अनिवार्य होगा। पुलिस विभाग इसे पारदर्शिता, जवाबदेही और आधुनिक रिकॉर्ड प्रबंधन की दिशा में अहम कदम मान रहा है।

प्रदेश के कई पुलिस थानों में वर्षों से जब्त वाहन, लावारिस सामान और पुराने मामलों से जुड़ी वस्तुएं मालखानों में पड़ी रहती थीं। इससे थानों में जगह की कमी के साथ रिकॉर्ड प्रबंधन में भी परेशानी आती थी। नई एसओपी लागू होने के बाद अब ऐसी संपत्तियों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत किसी भी लावारिस वस्तु या जब्त संपत्ति को पुलिस कब्जे में लेते ही उसकी एंट्री रजिस्टर और सीसीटीएनएस पोर्टल पर करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही सामान की फोटो, पहचान संबंधी विवरण और अन्य जरूरी जानकारी भी डिजिटल रूप से सुरक्षित रखी जाएगी। इससे रिकॉर्ड में गड़बड़ी या सामान गायब होने जैसी समस्याओं पर रोक लगेगी। यदि कोई वस्तु चोरी, अपराध या संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी पाई जाती है तो संबंधित मामले में एफआईआर या डीडीआर दर्ज करना भी जरूरी होगा। साथ ही जब्ती मेमो और पंचनामा तैयार किया जाएगा।

एसओपी में खराब होने वाली वस्तुओं के लिए भी स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। ऐसी वस्तुओं का 48 घंटे के भीतर एसडीपीओ या एसपी की अनुमति से निस्तारण किया जा सकेगा। वहीं सामान्य लावारिस संपत्ति के लिए 15 दिनों का सार्वजनिक नोटिस जारी करना अनिवार्य रहेगा। अधिक मूल्य वाली संपत्तियों की जानकारी स्थानीय समाचार पत्रों में भी प्रकाशित की जाएगी। यदि तय समय तक कोई दावा पेश नहीं किया जाता है, तो एसडीपीओ या एसपी की मंजूरी के बाद निपटान की प्रक्रिया शुरू होगी और इसकी रिपोर्ट संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट को भी भेजी जाएगी।

थानों में लंबे समय से खड़े लावारिस वाहनों को अब 90 दिनों के भीतर कानूनी प्रक्रिया पूरी कर हटाया जाएगा। एसओपी में साफ कहा गया है कि यदि किसी अधिकारी द्वारा देरी, लापरवाही या नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को इन निर्देशों को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए गए हैं।

संपत्तियों के निपटान की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए हर जिले में एसपी की अध्यक्षता में विशेष डिस्पोजल कमेटी गठित की जाएगी। इस कमेटी में पुलिस अधिकारियों के अलावा प्रशासनिक अधिकारी और संबंधित एसएचओ भी शामिल होंगे। कमेटी नीलामी, नष्ट करने और अन्य प्रक्रियाओं की निगरानी करेगी। नीलामी से प्राप्त राशि को सरकारी खजाने में जमा करवाया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत अब हर महीने लावारिस और निपटाई गई संपत्तियों की समीक्षा भी की जाएगी। आईजी स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग होगी और प्रत्येक माह की 7 तारीख तक विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजनी होगी। इसके अलावा मालखाना रिकॉर्ड और सीसीटीएनएस डेटा का समय-समय पर निरीक्षण भी किया जाएगा।

पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि मादक पदार्थ, हथियार, विस्फोटक और नकली मुद्रा जैसी संवेदनशील वस्तुओं के निस्तारण के लिए अलग नियम लागू होंगे। इन मामलों में एनडीपीएस एक्ट और एक्सप्लोसिव एक्ट सहित संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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