हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद ऊना जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को बड़ा कदम उठाना पड़ा है। कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बाद बुधवार को उपायुक्त ऊना और पुलिस विभाग द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे उन वाहनों को वापस माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर न्यास को सौंप दिया गया, जो मंदिर के कोष या श्रद्धालुओं के दान से खरीदे गए थे।
इन सभी वाहनों को अब मंदिर न्यास के यात्री निवास परिसर में खड़ा कर दिया गया है। यह कार्रवाई हाईकोर्ट के निर्देशों की अनुपालना में की गई है, जिसमें प्रशासन को पांच दिनों के भीतर वाहनों को लौटाने के आदेश दिए गए थे।
दरअसल, हाल ही में मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने अंकुर कालिया द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले पर कड़ी नाराजगी जताई थी। कोर्ट के सामने यह तथ्य आया था कि श्रद्धालुओं के दान से खरीदी गई इनोवा क्रिस्टा का उपयोग डीसी ऊना द्वारा किया जा रहा था, जबकि मंदिर को दान में मिली बोलेरो गाड़ी पुलिस विभाग के एसएचओ के पास थी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि मंदिर में आने वाले दान का उपयोग केवल धार्मिक गतिविधियों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए होना चाहिए। इसे सरकारी अधिकारियों के निजी या प्रशासनिक उपयोग में लाना पूरी तरह अनुचित है। कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया था कि सभी ऐसे वाहनों को तुरंत मंदिर न्यास को लौटाकर सुरक्षित रखा जाए।
For advertisements inquiries on HIM Live TV, Kindly contact us!
Connect with us on Facebook and WhatsApp for the latest updates!