हिमाचल प्रदेश में सेवाएं दे रहे 155 दैनिक वेतनभोगी और अंशकालिक कर्मचारी अब भी नियमितीकरण की राह देख रहे हैं। 31 मार्च 2025 तक लंबित मामलों की यह लिखित जानकारी मुख्यमंत्री ने विधायक इंद्रदत्त लखनपाल और सतपाल सिंह सत्ती के सवालों के जवाब में विधानसभा में दी। सरकार के अनुसार रिक्त पदों की कमी, न्यायालयी मामले, विभागीय जांच और पात्रता पूरी न होने जैसे कारणों से कई कर्मचारियों की नियमितीकरण प्रक्रिया लंबित है।
सरकारी विभागों में 108 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी नियमित नहीं हो सके हैं। इनमें अकेले उच्च शिक्षा विभाग के 101 कर्मचारी रिक्त पद उपलब्ध नहीं होने के कारण प्रभावित हैं। कृषि विभाग के दो मामले अदालत में लंबित हैं, जबकि परिवहन विभाग में एक कर्मचारी की विभागीय जांच चल रही है। ग्रामीण विकास विभाग में एक कर्मचारी आवश्यक शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करता।
बोर्डों और निगमों में 23 दैनिक वेतनभोगियों का नियमितीकरण भी लंबित है। यहां रिक्त पदों की कमी, न्यायालयी मामले और सरकारी नियम लागू न होने जैसी अड़चनें सामने आई हैं। वहीं शहरी स्थानीय निकायों में 11 कर्मचारी नियमित नहीं हो पाए हैं। इनमें सिलाई अध्यापिकाएं और पंचायत चौकीदार शामिल हैं, जिनके मूल विभाग में स्थानांतरण का मामला विचाराधीन है।
अंशकालिक कर्मचारियों को 31 मार्च 2025 तक सात वर्ष की सेवा पूरी करने पर दैनिक वेतनभोगी में बदलने का प्रावधान है। इसके बावजूद राजस्व विभाग में एक कर्मचारी का मामला विजिलेंस जांच के कारण लंबित है। बोर्डों और निगमों में 23 अंशकालिक कर्मचारियों का दैनिक वेतनभोगी में परिवर्तन भी रुका हुआ है। हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम के सात कर्मचारियों के मामले वित्तीय स्थिति के कारण विचाराधीन हैं, जबकि शहरी स्थानीय निकायों में 14 मामले लंबित हैं।
नई नीति में नियमितीकरण का प्रावधान
सरकार ने 1 अप्रैल 2026 को नई नीति जारी की है। इसके तहत 31 मार्च 2026 और 30 सितंबर 2026 तक चार वर्ष की लगातार सेवा पूरी करने वाले दैनिक वेतनभोगी और कंटीजेंट कर्मचारियों को नियमित करने का प्रावधान किया गया है। अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए भी इसी दिन दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
कर्मचारियों के लिए अलग नई स्थानांतरण नीति से इनकार
विधानसभा में सरकार ने कर्मचारियों के लिए अलग से नई स्थानांतरण नीति बनाने से भी इनकार किया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि 2013 के मौजूदा वृहद मार्गदर्शी सिद्धांत पर्याप्त हैं और नई पृथक स्थानांतरण नीति फिलहाल विचाराधीन नहीं है। बोर्ड और निगम अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार नियमितीकरण पर निर्णय ले सकेंगे।
हिमाचल में दंत चिकित्सकों के 59 पद खाली, भर्ती प्रक्रिया जारी
हिमाचल प्रदेश के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दंत चिकित्सकों के 59 पद रिक्त हैं। कुल 211 स्वीकृत पदों में से ये पद खाली बताए गए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने विधायक केवल सिंह पठानिया के सवाल के लिखित जवाब में विधानसभा में यह जानकारी दी।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि रिक्त पदों को भरना एक निरंतर प्रक्रिया है और सरकार निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इन पदों को भरने के लिए कार्रवाई कर रही है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी एनएचएम के तहत दंत चिकित्सकों के 14 पद स्वीकृत हैं और ये सभी पद वर्तमान में भरे हुए हैं।
एनएचएम के तहत स्वीकृत 14 पदों में से 13 राष्ट्रीय मौखिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत हैं। एक पद जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र के तहत आईजीएमसी शिमला के लिए मंजूर किया गया है। दोनों प्रकार के केंद्रों में कुल 211 पद स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 59 पद वर्तमान में रिक्त हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इन रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया जारी है।




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