हमीरपुर, 08 दिसंबर। हिमाचल प्रदेश की सरकार किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं को स्वरोजगार के अवसर देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में प्रदेश में मशरूम की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष सब्सिडी और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। हमीरपुर जिले के चमनेड गांव के राजकुमार ने इस अवसर का लाभ उठाकर सफलता की एक नई कहानी लिखी है।
शुरुआत कैसे हुई?
राजकुमार एक साधारण किसान हैं जो पारंपरिक खेती के साथ-साथ वेल्डिंग का काम भी करते थे। लेकिन इन दोनों ही कामों से उन्हें संतोषजनक आय नहीं हो पा रही थी। आय के बेहतर साधन की तलाश में उन्हें उद्यान विभाग के अधिकारियों से मशरूम की खेती के बारे में जानकारी मिली।

सरकार की सहायता से बढ़ा आत्मविश्वास
राजकुमार ने उद्यान विभाग की मदद से 100 बैग की एक छोटी मशरूम यूनिट स्थापित की। यूनिट लगाने के लिए उन्हें सरकार की ओर से 50 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। शुरुआती सफलता ने उनका हौसला बढ़ाया। उनकी मशरूम की मांग बढ़ने लगी, जिससे प्रेरित होकर उन्होंने अपनी यूनिट को 400 बैग तक बढ़ा दिया।
रोजाना सैकड़ों पैकेट तैयार
पीक सीजन में राजकुमार हर दिन 500-600 पैकेट मशरूम तैयार करते हैं। इन पैकेट्स को वह थोक बाजार में 20-22 रुपये प्रति पैकेट के हिसाब से बेचते हैं। इससे उन्हें रोजाना हजारों रुपये की आय होती है।
बेरोजगार युवाओं के लिए प्रेरणा
राजकुमार का कहना है कि उद्यान विभाग की इस योजना ने उनकी जिंदगी बदल दी है। यह योजना बेरोजगार युवाओं के लिए भी एक वरदान साबित हो सकती है। अगर युवा घर पर मशरूम की यूनिट लगाएं, तो वे सालाना लाखों रुपये कमा सकते हैं।
कैसे करें मशरूम की खेती की शुरुआत?
- प्रशिक्षण: उद्यान विभाग समय-समय पर मशरूम की खेती के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है।
- सब्सिडी: सरकार से 40-50% की सब्सिडी मिल सकती है।
- मार्केटिंग: मशरूम की अच्छी पैकेजिंग और मार्केटिंग से बिक्री बढ़ सकती है।

अगर आप भी कृषि में नए अवसरों की तलाश में हैं, तो मशरूम की खेती एक लाभदायक विकल्प हो सकता है।
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