Kangra: धर्मशाला में नगर निगम के विश्रामगृह पर पार्षदों ने जड़ा ताला, कर्मचारी आवास बनाने की कोशिश पर भड़का विवाद; जनरल हाउस के फैसले की अनदेखी का आरोप

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धर्मशाला। नगर निगम धर्मशाला के वार्ड नंबर 15 खनियारा स्थित विश्रामगृह को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को वार्ड नंबर 15 के पार्षद प्रवीण प्रकाश और वार्ड नंबर 13 के पार्षद हर्ष ओबेरॉय ने विश्रामगृह के मुख्य द्वार पर ताला लगाकर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया। इस दौरान पार्षद हर्ष ओबेरॉय ने मौके पर पहुंचकर पार्षद प्रवीण प्रकाश के इस कदम का समर्थन किया।

दरअसल, वार्ड नंबर 15 खनियारा के पार्षद प्रवीण प्रकाश ने नगर निगम के जनरल हाउस की बैठक में प्रस्ताव रखा था कि इस भवन को उसके मूल स्वरूप यानी विश्रामगृह के रूप में ही विकसित और संचालित किया जाए। सदन में मौजूद सभी पार्षदों ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई थी। प्रवीण प्रकाश का कहना था कि धर्मशाला एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जहां हर दिन बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में इस भवन को विश्रामगृह के रूप में चलाने से नगर निगम को अतिरिक्त आय हो सकती है, जिसका इस्तेमाल शहर के विकास कार्यों में किया जा सकेगा। साथ ही, इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

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पार्षदों का आरोप है कि जनरल हाउस में प्रस्ताव पारित होने के बावजूद नगर निगम के अधिकारी भवन को विश्रामगृह के रूप में विकसित करने के बजाय इसे कर्मचारी आवास में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। आरोप के मुताबिक, सोमवार को नगर निगम के एक कर्मचारी ने विश्रामगृह में घरेलू सामान रख दिया और अपने परिवार के साथ वहां रहना शुरू कर दिया। इस मामले की जानकारी पार्षद प्रवीण प्रकाश ने नगर निगम आयुक्त और संयुक्त आयुक्त को भी दी थी।

पार्षदों का कहना है कि अधिकारियों के सामने मामला उठाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मंगलवार को पार्षद प्रवीण प्रकाश और हर्ष ओबेरॉय ने विश्रामगृह के मुख्य द्वार पर ताला लगाकर अपना विरोध दर्ज करवाया।

गौरतलब है कि नगर निगम के इस विश्रामगृह का जीर्णोद्धार कार्य अभी जारी है। ऐसे में काम पूरा होने से पहले ही भवन का इस्तेमाल कर्मचारी आवास के तौर पर किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। पार्षदों ने सवाल किया कि जब जनरल हाउस में इस भवन को विश्रामगृह के रूप में संचालित करने का प्रस्ताव पारित हो चुका है, तो अधिकारी इसके विपरीत कदम क्यों उठा रहे हैं।

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वहीं, इस पूरे मामले में नगर निगम आयुक्त और संयुक्त आयुक्त की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन इस विवाद पर क्या कदम उठाता है और जनरल हाउस में पारित प्रस्ताव को लागू करने के लिए कब तक कार्रवाई की जाती है।

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