हिमाचल प्रदेश में चेस्टर हिल्स के खिलाफ रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) में चल रहे मामले में शिकायतकर्ता ने अपनी मौजूदा शिकायत वापस ले ली है। ऑनलाइन आवेदन और जमा किए गए कागजी दस्तावेजों में कई विसंगतियां सामने आने के बाद यह फैसला लिया गया। रेरा की दो सदस्यीय पीठ ने शिकायत वापस लेने की अनुमति देते हुए शिकायतकर्ता को जरूरी दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी कर नए सिरे से याचिका दायर करने की छूट दे दी है।

हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण के समक्ष विकास वर्मा एवं अन्य बनाम मैसर्स चेस्टर हिल्स एवं अन्य मामले की सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई रेरा अध्यक्ष आरडी धीमान और सदस्य विदुर मेहता की संयुक्त पीठ ने की। सुनवाई के दौरान पीठ ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की। इसमें पोर्टल पर दर्ज ऑनलाइन शिकायत और प्राधिकरण के सामने पेश की गई हार्ड कॉपी के विवरण में कई अंतर पाए गए। दोनों दस्तावेजों के तथ्यों और प्रारूप में भी विसंगतियां सामने आईं। इसके अलावा शिकायतकर्ता की ओर से एक अतिरिक्त शपथपत्र भी दाखिल किया गया था।
रिकॉर्ड में मिली तकनीकी कमियों और दस्तावेजों के बीच अंतर को देखते हुए शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने मौजूदा शिकायत वापस लेने का अनुरोध किया। उन्होंने पीठ से अपील की कि शिकायतकर्ता को सभी कमियां दूर करने और जरूरी दस्तावेजों के साथ नए सिरे से शिकायत दाखिल करने की अनुमति दी जाए।
दोनों पक्षों की मौजूदगी में पीठ ने इस अनुरोध पर विचार किया और शिकायत वापस लेने की अनुमति दे दी। अब शिकायतकर्ता जरूरी दस्तावेजों और निर्धारित औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद रेरा में दोबारा याचिका दायर कर सकता है। फिलहाल मौजूदा शिकायत वापस लिए जाने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई नई याचिका दाखिल होने पर निर्भर करेगी।


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