हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के हरोली में बन रहे बल्क ड्रग पार्क के निर्माण में देरी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाराजगी जताई है। पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान की प्रगति की समीक्षा के लिए हुई उच्च स्तरीय ऑनलाइन बैठक में प्रधानमंत्री ने हिमाचल समेत अन्य राज्यों में बन रहे बल्क ड्रग पार्कों की धीमी रफ्तार पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रदेश सरकार को 30 दिन के भीतर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
हिमाचल में बल्क ड्रग पार्क का निर्माण मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए परियोजना के वर्ष 2028 तक खिंचने के आसार नजर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने संबंधित मंत्रालयों और क्रियान्वयन एजेंसियों को परियोजना से जुड़ी बाधाओं को जल्द दूर करने और निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।

30 दिन में तय करने होंगे नए लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने सभी संबंधित मंत्रालयों को अगले 30 दिनों के भीतर भूमि हस्तांतरण, यूटिलिटी शिफ्टिंग और निर्माण कार्यों के संशोधित लक्ष्य निर्धारित करने को कहा। इसके साथ ही उन्होंने परियोजना में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और नोडल एजेंसियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश भी दिए हैं।
परियोजना की प्रगति पर अब हर 15 दिन में नजर रखी जाएगी। इसके लिए गति शक्ति पोर्टल के माध्यम से नियमित समीक्षा होगी। प्रधानमंत्री ने कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, स्टीम जेनरेशन, टेस्टिंग लैब और वेयरहाउसिंग जैसी साझा सुविधाओं के टेंडर और निर्माण कार्यों में भी तेजी लाने को कहा है। इसी महीने हुई तैयारी बैठक में भी परियोजना की धीमी प्रगति पर चिंता जताई गई थी। बैठक में प्रदेश सरकार की ओर से मुख्य सचिव केके पंत और प्रधान सचिव उद्योग एम सुधा देवी मौजूद रहे।
भूमि समतलीकरण और बिजली-पानी के काम में देरी
केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 में वित्तीय प्रोत्साहन योजना के तहत हिमाचल प्रदेश, गुजरात और आंध्र प्रदेश में बल्क ड्रग पार्क स्थापित करने को मंजूरी दी थी। हरोली में विकसित किया जा रहा बल्क ड्रग पार्क उत्तर भारत की प्रमुख औद्योगिक परियोजनाओं में शामिल है।
परियोजना में भूमि समतलीकरण, बिजली के सब-स्टेशन और पानी की पाइपलाइन बिछाने जैसे कामों में देरी हुई है। इन कार्यों की धीमी रफ्तार का असर निर्माण की समय सीमा पर पड़ा है। विभिन्न विभागों के बीच अपेक्षित समन्वय नहीं बन पाने को भी परियोजना की धीमी प्रगति की एक वजह माना जा रहा है।


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