हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर स्थित डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के मामले में कॉलेज प्रबंधन ने सख्त कार्रवाई की है। दिल्ली निवासी प्रथम वर्ष के एक छात्र की शिकायत पर एंटी रैगिंग कमेटी ने जांच की। जांच रिपोर्ट के आधार पर द्वितीय वर्ष के 9 एमबीबीएस प्रशिक्षुओं को दो सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही मामले में शामिल पाए गए छात्रों पर हजारों रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। कॉलेज प्रबंधन ने अब कैंपस के बाहर संचालित निजी होस्टलों और पीजी में भी निगरानी बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।
सीनियर छात्रों पर गिरी कार्रवाई की गाज
जांच रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज प्रशासन ने निलंबन के साथ आर्थिक दंड भी लगाया है। रैगिंग के लिए इस्तेमाल किए गए पीजी कमरे से जुड़े छात्रों और जूनियर विद्यार्थियों को वहां लेकर जाने वाले छात्रों पर प्रति छात्र 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा, मामले में संलिप्तता पाए जाने पर छह अन्य छात्रों पर 25-25 हजार रुपये की पेनल्टी लगाई गई है।
बड़ू, दोसड़का और सलासी के निजी होस्टलों पर बढ़ेगी निगरानी
इस घटना के बाद कॉलेज प्रबंधन ने विद्यार्थियों की सुरक्षा को कैंपस के बाहर भी मजबूत करने का फैसला किया है। मिली जानकारी के अनुसार, कॉलेज प्रशासन ने बड़ू, दोसड़का और सलासी में संचालित निजी होस्टलों और पीजी में निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विद्यार्थी कॉलेज परिसर के बाहर भी सुरक्षित महसूस करें और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
प्राचार्य बोले- नियमों के तहत की गई सख्त कार्रवाई
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने बताया कि संबंधित चार छात्रों के अभिभावकों को बुलाकर उन्हें जांच रिपोर्ट और की गई कार्रवाई की पूरी जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि कॉलेज प्रबंधन का उद्देश्य विद्यार्थियों को पूरी तरह सुरक्षित और भयमुक्त माहौल उपलब्ध करवाना है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
शिकायत में क्या कहा गया था?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली निवासी प्रथम वर्ष के छात्र ने शिकायत में आरोप लगाया था कि उसे और अन्य जूनियर विद्यार्थियों को भोटा चौक के पास एक सीनियर के किराए के पीजी कमरे में बुलाया गया था। वहां उन्हें सीनियर से बात करते समय नजरें नीचे रखने और मिलने पर “नमस्ते, डॉक्टर साहब” कहने के निर्देश दिए गए थे। जूनियर छात्रों को अपना परिचय देने का एक खास तरीका भी बताया गया था। जांच के दौरान शिकायतकर्ता समेत आठ जूनियर छात्रों के बयान दर्ज किए गए। हालांकि, आरोपों का सामना कर रहे सीनियर छात्रों ने इन्हें नकार दिया।


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