हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से एक ही जिले में तैनात उपायुक्तों के तबादले कभी भी हो सकते हैं। उपायुक्तों के तबादलों से जुड़ी फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय में विचाराधीन है। कार्मिक विभाग के उच्चाधिकारियों और मुख्य सचिव के साथ मुख्यमंत्री की उच्चस्तरीय बैठक में सभी जिलों में तैनात उपायुक्तों के कार्यकाल और कार्यशैली को लेकर चर्चा हो चुकी है।
प्रदेश के शिमला, सोलन, मंडी और कांगड़ा समेत कई जिलों में उपायुक्त लंबे समय से तैनात हैं। इनमें कुछ जिलाधीशों को एक ही जिले में तीन साल से अधिक समय हो चुका है। कार्मिक विभाग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक सामान्य तौर पर उपायुक्तों का कार्यकाल तीन साल का होता है। ऐसे में निर्धारित अवधि पूरी कर चुके अधिकारियों के तबादले की संभावना बढ़ गई है।
कार्यकाल के साथ प्रदर्शन भी बनेगा तबादले का आधार
उच्चस्तरीय बैठक में प्रत्येक जिले में तैनात उपायुक्त के कार्यकाल के साथ उनकी कार्यशैली और प्रदर्शन की भी समीक्षा की गई है। सरकार यह भी देख रही है कि संबंधित अधिकारी ने अपने जिले में किस तरह काम किया और प्रशासनिक स्तर पर उसका प्रदर्शन कैसा रहा।
अच्छी कार्यशैली और बेहतर प्रदर्शन वाले कुछ उपायुक्तों को मौजूदा जिलों में कुछ और समय तक बनाए रखने पर भी विचार किया जा सकता है। वहीं, जिन अधिकारियों के खिलाफ मंत्री, विधायक या आम लोगों की ओर से सरकार के पास शिकायतें पहुंची हैं, उनके तबादले की संभावना भी जताई जा रही है।
फिलहाल तबादलों को लेकर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री कार्यालय को लेना है। मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलने के बाद ही अधिकारियों की तबादला सूची जारी होगी। ऐसे में लंबे समय से एक ही जिले में तैनात उपायुक्तों के साथ-साथ शिकायतों के घेरे में आए अधिकारियों में भी बदलाव संभव माना जा रहा है।




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