कांगड़ा घाटी में पर्यटन और कनेक्टिविटी को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद जगी है। प्रस्तावित पठानकोट-जोगिंदरनगर रेलवे लाइन के ब्रॉडगेज विस्तार की दिशा में अब जमीनी स्तर पर काम शुरू हो गया है। भारतीय रेलवे की ओर से नियुक्त कंसल्टेंसी ने डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए सर्वे शुरू कर दिया है। लंबे समय से प्रतीक्षित इस परियोजना को इससे आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है।

चल रहा ट्रैफिक सर्वे फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) और रेलवे बोर्ड से मंजूर DPR का अहम हिस्सा है। परियोजना का तकनीकी और वित्तीय आकलन व्यापक तरीके से करने के लिए उत्तर रेलवे ने यह काम निजी कंसल्टेंसी फर्म M/s LN Malviya Infra Projects Private Limited को सौंपा है।
200 किलोमीटर के रेल कॉरिडोर में सर्वे
विशेष सर्वे टीमें करीब 200 किलोमीटर लंबे रेल कॉरिडोर में तैनात की गई हैं। यह रेल मार्ग पंजाब के पठानकोट से हिमाचल प्रदेश के जोगिंदरनगर तक फैला है। टीमें मौके पर आबादी का घनत्व, स्थानीय लोगों के यात्रा पैटर्न, वर्तमान और भविष्य की माल ढुलाई की जरूरत, पर्यटन की संभावनाओं और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ा डेटा जुटा रही हैं।
सर्वे से मिले आंकड़ों के आधार पर Economic Internal Rate of Return (EIRR) और Financial Internal Rate of Return (FIRR) की गणना की जाएगी। यही आंकड़े परियोजना की आर्थिक और वित्तीय व्यवहार्यता तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

ब्रॉडगेज लाइन से हिमाचल की कनेक्टिविटी होगी मजबूत
रेलवे योजनाकारों के अनुसार प्रस्तावित ब्रॉडगेज लाइन हिमाचल प्रदेश को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ेगी। इससे क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने, माल ढुलाई को तेज करने और कांगड़ा घाटी में पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
जमीन की मार्किंग से स्थानीय लोगों में बढ़ी हलचल
सर्वे के दौरान जमीन की मार्किंग शुरू होने से स्थानीय लोगों में भी काफी रुचि देखने को मिल रही है। खासकर उन लोगों की नजर इस प्रक्रिया पर है, जिनकी संपत्तियां प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण कॉरिडोर में आ सकती हैं। रेलवे अधिकारियों की ओर से विस्तृत सर्वे और संबंधित पक्षों से बातचीत जल्द पूरी किए जाने की उम्मीद है। इसके बाद लाइन का अंतिम अलाइनमेंट और भूमि अधिग्रहण की योजना तय की जाएगी।

पुरानी नैरोगेज लाइन को बचाने की तैयारी
परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी आधुनिक होने की उम्मीद है, लेकिन करीब एक सदी से हिमाचल की सेवा कर रही ऐतिहासिक नैरोगेज रेल लाइन को बनाए रखने की भी योजना है।
सूत्रों के अनुसार मौजूदा नैरोगेज ट्रैक को बरकरार रखा जा सकता है। जहां संभव होगा, नई ब्रॉडगेज लाइन मौजूदा ट्रैक के साथ-साथ नई अधिग्रहित जमीन पर बिछाई जाएगी। इससे निर्माण के दौरान ऐतिहासिक रेल सेवा में व्यवधान को कम करने में मदद मिल सकती है।

कांगड़ा और मंडी के आर्थिक विकास को मिलेगा फायदा
पठानकोट-जोगिंदरनगर रेलवे लाइन कांगड़ा घाटी की ऐतिहासिक नैरोगेज रेल लाइन है। लंबे समय से इसे क्षेत्र की बढ़ती परिवहन जरूरतों के लिए अपर्याप्त माना जाता रहा है। प्रस्तावित ब्रॉडगेज विस्तार से यात्री और माल परिवहन बेहतर होने के साथ क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है। इससे कांगड़ा और मंडी जिलों के आर्थिक विकास और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
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