हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में इस बार मानसून ने भारी तबाही मचाई है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और भूस्खलन से जिले में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अब तक सरकारी और निजी संपत्ति को करीब 128 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। सबसे अधिक असर लोक निर्माण विभाग और जल शक्ति विभाग पर पड़ा है। कई सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जबकि पेयजल योजनाएं भी ठप पड़ी हैं। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में बहाली का काम युद्धस्तर पर कर रहा है।

कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा ने बताया कि मानसून सीजन के दौरान अब तक जिले में 33 पक्के मकान पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं, जबकि 39 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा बारिश और भूस्खलन के कारण 39 मवेशियों की भी मौत हुई है। उन्होंने बताया कि सबसे अधिक नुकसान बोह वैली क्षेत्र में हुआ है, जहां कई परिवारों ने अपना घर और जीवनभर की जमा-पूंजी खो दी है।

उपायुक्त ने बताया कि हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने स्वयं बोह वैली का दौरा किया था और प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की थी। प्रशासन पुनर्वास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है ताकि प्रभावित परिवारों को जल्द राहत मिल सके।

जिला प्रशासन के अनुसार आपदा प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत उपलब्ध कराई जा रही है। संबंधित क्षेत्रों के एसडीएम और तहसीलदारों के माध्यम से फौरी राहत राशि वितरित की जा रही है, जिससे प्रभावित लोग अपनी आवश्यक जरूरतें पूरी कर सकें। प्रशासन का कहना है कि राहत और पुनर्वास कार्य लगातार जारी हैं।

इस बीच मौसम विभाग की ओर से जारी येलो अलर्ट के मद्देनजर जिला प्रशासन ने लोगों और पर्यटकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी भी जारी की है। प्रशासन ने अपील की है कि लोग नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें तथा मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
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