पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष Jairam Thakur ने प्रदेश सरकार की आबकारी नीति और राजस्व दावों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन का दावा करने वाली सरकार आबकारी राजस्व बढ़ाने में सफल नहीं हो पाई है। उनका आरोप है कि जिन कंपनियों को शराब यूनिट आवंटित किए गए हैं, वे समय पर लाइसेंस फीस तक जमा नहीं कर पा रही हैं, जिसके चलते विभाग को उनके ठेके सील करने पड़ रहे हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि कुल्लू, लाहुल और पांगी क्षेत्र में शराब के ठेके चलाने का जिम्मा कांग्रेस शासित तेलंगाना की कंपनी एपीटको को दिया गया था। उनके अनुसार नियमों में बदलाव कर कुल्लू-लाहुल-पांगी जैसे पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों के ठेकों को एक ही यूनिट के रूप में नीलाम किया गया। उन्होंने दावा किया कि बेस प्राइस से केवल एक लाख रुपये अधिक की बोली लगाकर कंपनी ने यह यूनिट हासिल की थी, लेकिन संचालन के शुरुआती दौर में ही कंपनी वित्तीय दबाव में आ गई।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि मई माह की करीब 15 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस जमा न होने के कारण प्रशासन को संबंधित शराब ठेके सील करने पड़े। उन्होंने कहा कि यदि पर्यटन सीजन के चरम समय में यह स्थिति है, तो आने वाले महीनों में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
जयराम ठाकुर ने यह भी कहा कि इससे पहले विभिन्न निगमों और बोर्डों के माध्यम से शराब बिक्री के प्रयोग किए गए, जिनसे संस्थाओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आबकारी विभाग में किए गए प्रयोगों के बावजूद राजस्व बढ़ाने में सफल नहीं हुई है। उनके अनुसार उपलब्ध आंकड़े और जमीनी स्थिति सरकार के दावों पर सवाल खड़े करते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को आबकारी नीति और राजस्व प्रबंधन को लेकर स्पष्ट जवाब देना चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर राज्य की आर्थिक स्थिति से जुड़ा विषय है।
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