Delays Continue: कछियारी-भंगवार फोरलेन प्रोजेक्ट पर यात्रियों का इंतजार और बढ़ा, पुल निर्माण में 3-4 महीने और लगने की उम्मीद

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कछियारी से भंगवार तक मटौर-शिमला फोरलेन परियोजना का इंतजार कर रहे यात्रियों के लिए राहत अभी दूर नजर आ रही है। एनएचएआई द्वारा इस महत्वाकांक्षी मार्ग की डेडलाइन पिछले एक साल में कई बार बढ़ाई जा चुकी है, लेकिन काम की रफ्तार अभी भी धीमी बनी हुई है। समेला के पास रियूंद खड्ड पर निर्माणाधीन फोरलेन पुल को पूरा होने में अभी कम से कम तीन से चार महीने और लगने की संभावना जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार पुल के पिलरों की ऊंचाई पूरी कर ली गई है और अब उनके आधे हिस्से तक मिट्टी फिलिंग का काम जारी है, जिसमें हजारों टिप्परों से मिट्टी डाली जा रही है। इसके बाद जॉइंट और स्पैन स्ट्रक्चर लगाने के लिए भारी मशीनरी और क्रेनों का इस्तेमाल किया जाएगा। अंत में साइड एप्रोच और डंगे के कार्य पूरे होने के बाद ही पुल का निर्माण पूर्ण होगा। इसके बाद ही कछियारी से भंगवार तक यातायात शुरू हो पाएगा।

एनएचएआई की इस धीमी कार्यप्रगति से स्थानीय लोगों और वाहन चालकों में निराशा बढ़ती जा रही है। लंबे समय से अधूरे इस प्रोजेक्ट को लेकर लोगों में आक्रोश भी देखने को मिल रहा है।

इसी बीच अन्य फोरलेन परियोजनाओं की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। परवाणू-शिमला फोरलेन अब तक अधूरा है, जबकि कीरतपुर-मनाली मार्ग की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मानी जा रही है। पठानकोट-मंडी फोरलेन जसूर क्षेत्र में धीमा पड़ा हुआ है। राजोल से ठानपुरी और परौर से पद्धर तक के मार्गों की डीपीआर भी अभी तक तैयार नहीं हो पाई है। ठानपुरी से परौर तक का निर्माण कार्य भी बेहद धीमी गति से चल रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी हो रही है।

मटौर-शिमला फोरलेन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। भंगवार से हमीरपुर तक यह मार्ग अभी भी टू-लेन ही है, जबकि ज्वालामुखी मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल के कारण यहां पूरे वर्ष भारी यातायात रहता है। ऐसे में टू-लेन व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

वहीं, समेला सुरंग परियोजना की दोनों ट्यूब जुलाई में ब्रेकथ्रू हो चुकी हैं। लगभग 1200 मीटर लंबी इस ट्विन ट्यूब सुरंग में 10.5 मीटर ऊंचाई और 13 मीटर चौड़ाई के साथ आधुनिक सुविधाएं जैसे वेंटिलेशन, स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म, स्प्रिंकल सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट और ऑटोमेटिक टोल सिस्टम शामिल होंगे।

इस परियोजना के पूरा होने के बाद कछियारी से रानीताल की दूरी लगभग 6 किलोमीटर कम हो जाएगी और यात्रा का समय 45 मिनट से घटकर केवल 15 मिनट रह जाएगा। हालांकि, लोगों का कहना है कि बार-बार देरी के चलते यह सपना अभी दूर ही नजर आ रहा है।

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